शहर में चारों ओर बन रहीं अवैध कालोनियां पर डीटीपी विभाग की कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। एक बार किसी कालोनी पर पीला पंजा जरुर चलता है। लेकिन अधिकतर मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती है। इतना ही नहीं डीटीपी की ओर से दस - बीस साल पुरानी कालोनियों में भी टांग दिए गए खरीद - फरोख्त ना करने के बोर्ड पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शहर में पिछले छह माह में अवैध कालोनियां पनप रहीं हैं। यह कालोनियां करनाल रोड, अंबाला रोड, ढांड रोड, जींद रोड सहित शहर की अधिकांश जगहों पर हैं। जहां पर नियमानुसार सीएलयू या अन्य कागजी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। प्रॉपर्टी मामलों के जानकारों का कहना है कि पिछले छह माह में पीला पंजा चलाए जाने की कार्रवाई तो खूब हुई है। लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ता। कुछेक मामलों को छोड़ दिया जाए तो आगे एफआईआर नहीं करवाई जा रही है। लोगों के मन में सवाल है कि आखिर पीला पंजा चलने के बाद कार्रवाई क्यों ठहर जाती है। क्या फिर वह कालोनी नियमित हो जाती है? या फिर पीला पंजा चलाने के मामले में कोई बड़ा खेल खेला जा रहा है।
विधायक लीला राम का कहना है कि यह बात उनकी जानकारी में आई है कि कुछ कर्मचारी व अधिकारी पीला पंजा चलाने के बाद लोगों को परेशान कर रहे हैं। क्योंकि आज तक जनहित में कोई काम उनका नजर नहीं आया। अब चिंता का विषय यह है कि शहर में ऐसी कालोनियों में भी बोर्ड टांग दिए गए हैं, जिन कालोनियों को विकसित हुए दस से बीस साल हो चुके हैं। वहां बोर्ड टांग कर ये अधिकारी ना जाने क्या साबित करना चाहते हैं? वे इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट बनाकर माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे। ताकि जनता को अनावश्यक परेशानी ना हो।
डीटीपी अनिल नरवाल से मोबाइल पर बात करने की कोशिश की गई लेकिन कोई जवाबनहीं मिला। उनके कार्यालय सहायक मेहरसिंह ने कहा कि विभाग द्वारा समय-समय पर आवश्यक कार्रवाई की जाती है। एफआईआर भी करवाई गई हैं। कितने अभियान चले और कितनी एफआईआर हुई हैं। यह जानकारी पटवारी दे सकते हैं। पटवारी कार्यालय में मौजूद नहीं हैं।