कैथल। कभी परिवार की बंदिशों के कारण चोरी-छिपे स्टेडियम पहुंचने वाली कैथल की बेटी मनीषा मौण आज अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग में अपनी पहचान बना चुकी हैं। एक किसान परिवार में जन्मीं मनीषा ने आर्थिक तंगी, चोट और सामाजिक सोच जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए रिंग तक का सफर तय किया। उनकी कहानी सिर्फ पदक जीतने की नहीं बल्कि उन लड़कियों के लिए रास्ता खोलने की भी है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं। वर्तमान में वे बॉक्सिंग कोच के रूप में कुरुक्षेत्र में कार्यरत हैं।
गांव मटौर में 23 दिसंबर 1997 को जन्मीं मनीषा के पिता कृष्ण कुमार डेढ़ एकड़ जमीन पर खेती करते थे। सीमित आमदनी के कारण परिवार के लिए गुजारा करना भी आसान नहीं था। मनीषा को टीवी पर दिग्गज बॉक्सर मैरीकॉम को खेलते देख बॉक्सिंग का शौक हुआ। उन्होंने भी रिंग में उतरकर देश के लिए पदक जीतने का सपना देखा लेकिन शुरुआत में परिवार को उनकी खेल में रुचि पसंद नहीं थी। उन्हें लगता था कि खेल के कारण पढ़ाई प्रभावित होगी। ऐसे में मनीषा स्कूल के बाद खेलने का बहाना बनाकर स्टेडियम पहुंच जाती थीं।
चोट भी नहीं तोड़ पाई हौसला
आरकेएसडी कॉलेज के बॉक्सिंग प्रशिक्षण केंद्र में कोच राजेंद्र सिंह, गुरमीत सिंह और विक्रम ढुल से प्रशिक्षण लेने वाली मनीषा ने शुरुआती प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर परिवार का भरोसा हासिल किया। हालांकि वर्ष 2018 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता के दौरान उनकी कोहनी में चोट लग गई। इलाज और ऑपरेशन के लिए पैसे जुटाना चुनौती था। लंबे समय तक परेशानी झेलने के बावजूद उन्होंने खेल से नाता नहीं तोड़ा और 2021 में ऑपरेशन करवाया।
पदकों से बढ़ाया देश का मान
मनीषा ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभा साबित की। वर्ष 2018 में आईबा ओपन में स्वर्ण, 2019 में एशियन चैंपियनशिप में कांस्य और आईबा ओपन में रजत पदक जीता। 2020 में जर्मनी के केमिस्ट्री कप में स्वर्ण और 2021 की सीनियर राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया। वर्ष 2022 में विश्व महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी थी।
मनीषा की सफलता से दूसरी लड़कियों को मिली राह
मनीषा की यात्रा उन परिवारों के लिए भी संदेश है, जहां बेटियों के खेलों में आगे बढ़ने के लिए आशंकाएं रहती हैं। उनकी उपलब्धियों ने दिखाया कि सही प्रशिक्षण, दृढ़ इच्छाशक्ति और अवसर मिलने पर बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं। उनके संघर्ष और सफलता से प्रेरित होकर सैकड़ों खिलाड़ी स्टेडियम तक पहुंची हैं और बॉक्सिंग सहित खेलों में अपना भविष्य तलाशने लगी हैं।
मनीषा की कहानी बताती है कि एक खिलाड़ी की जीत सिर्फ उसके अपने सपनों को पूरा नहीं करती, बल्कि दूसरी लड़कियों के लिए भी नई संभावनाओं के दरवाजे खोलती है। यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।
बॉक्सिंग खिलाड़ी व कोच मनीषा मौण।