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Kaithal News: चुनाव ः कैथल में खिलेगा कमल या पंजा दिखाएगा ताकत

Fri, 30 Aug 2024 07:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कमल बहल
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कैथल। प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों में इस बार जिले की हॉट सीट कैथल विधानसभा में इस बार कांटे का मुकाबला हो सकता है। मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा का माना जा रहा है लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी का किया गया प्रदर्शन भी कोई नया गुल खिला सकता है।

अभी तक किसी भी दल ने प्रत्याशी के नाम का खुलासा नहीं किया है लेकिन चर्चाओं के अनुसार, मुख्य भिड़ंत कांग्रेस और भाजपा में बताई जा रही है। गौरतलब है कि 2004 व 2009 व 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहा था जबकि पिछले चुनाव 2019 में लीला राम ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी।
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रिटायर्ड प्राध्यापक प्रो. अमृत लाल मदान ने बताया कि इस क्षेत्र में आईटीआई व क्योड़क बूथ सबसे बड़ा माना जाता है। यहां करीब 30 हजार मतदाता हैं। दोनों ही बूथ के मतदाता की प्रत्याशियों की हार-जीत में अहम भूमिका रहती है। यही कारण है इन बूथों पर पार्टी प्रत्याशी व नेताओं की खास नजर रहती है। कैथल हलके से दो लाख दो हजार 797 मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे। इनमें एक लाख सात हजार 861 पुरुष तो 94 हजार 936 महिला मतदाता हैं। 206 बूथ मतदान के लिए बनाए गए हैं। 68 के करीब गांव इस हलके में हैं। इस हलके का मतगणना केंद्र आरकेएसडी कॉलेज को बनाया है। महिलाओं की आधी आबादी होने के बावजूद इस सीट पर कांग्रेस पार्टी को छोड़कर आज तक किसी भी राजनीतिक दल ने महिला को मैदान में चुनाव लड़ने के लिए नहीं उतारा है।

आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र के मतदाताओं ने दो बार निर्दलीय विधायकों को चुना है, अन्य 11 बार पार्टी प्रत्याशियों को कमान सौंपी है। प्रदेश की पुरानी सीटों में शुमार कैथल का चाहे संयुक्त पंजाब हो या हरियाणा गठन के बाद की सरकार 13 में से सात बार मंत्री मंडल में अहम पद मिला है।

कैथल विधानसभा सीट पर अब तक 14 विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा जीत का रिकार्ड पूर्व वित्तमंत्री ओम प्रभा जैन के नाम हैं। वे वर्ष 1962 से लेकर 1968 तक हुए तीन चुनाव में लगातार यहां से विधायक बनीं। पंजाब विधानसभा में वित्तमंत्री रही।

वर्ष 1972 के चुनाव में चौथी बार उतरी, इस चुनाव में वे सीएम पद की दावेदार थी, लेकिन चुनाव हारने के बाद उनका यह सपना अधूरा रह गया। उनके बाद इस सीट पर सुरजेवाला परिवार 2004 से 2014 तक हुए तीन चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाई। इसके अलावा यहां से पूर्व वित्तमंत्री चरण दास शोरेवाला, सुरेंद्र मदान दो-दो बार विधायक रहे हैं।

वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर रणदीप सिंह सुरजेवाला विधायक बने थे। सुरजेवाला को 65 हजार 524 वोट मिले थे। इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ रहे कैलाश भगत को 41 हजार 849 वोट मिले, वे दूसरे नंबर पर रहे थे। तीसरे नंबर पर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे राव सुरेंद्र सिंह मैदान में थे। राव को 38 हजार 171 वोट मिले थे।
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इसी प्रकार 2009 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ विधायक बने रणदीप सिंह सुरजेवाला को 59 हजार 889, इनेलो के कैलाश भगत दूसरे नंबर पर थे। भगत को 37 हजार 387 वोट मिले, जबकि तीसरे नंबर पर बसपा की टिकट पर चुनाव लड़े सुरेश गर्ग नौच को 13 हजार 967 वोट मिले थे। वर्ष 2019 में विधायक लीला राम ने सुरजेवाला को करीब 750 मतों से मात दी थी। संवाद
अब तक ये बने विधायक
वर्ष
विधायक
पार्टी

2014
रणदीप सिंह सुरजेवाला
कांग्रेस

2009
रणदीप सिंह सुरजेवाला
कांग्रेस

2005
शमशेर सिंह सुरजेवाला
कांग्रेस

2000
लीला राम
इनेलो

1996
चरण दास शोरेवाला एसएपी

1991
सुरेंद्र कुमार मदान
कांग्रेस

1987
सुरेंद्र कुमार मदान
लोकदल

1982
रोशनलाल तिवारी
कांग्रेस

1977
रघुनाथ गोयल जेएनपी

1972
चरण दास शोरेवाला
आजाद

1968
ओम प्रभा जैन
कांग्रेस

1967
ओम प्रभा जैन
कांग्रेस

1962
ओम प्रभा जैन
कांग्रेस

1957
ओम प्रभा जैन
कांग्रेस

1952
मा. दौलत राम
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