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Kaithal News: बाड़ेे में भुक्की रख बेचने पर बुजुर्ग को चार वर्ष की कैद

Wed, 24 Jan 2024 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व एनडीपीएस एक्ट की विशेष अदालत संगीता राय सचदेव की अदालत ने भुक्की (नशीला पदार्थ) रखने के केस में एक दोषी को चार वर्ष की कैद और डेढ़ लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दोषी को छह महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। इस मामले में 72 वर्षीय बुजुर्ग दोषी सतनाम के खिलाफ तहत 2019 की सितंबर में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

नशे की रोकथाम के लिए सरकार की तरफ से केस की पैरवी करने वाले उप जिला न्यायवादी जय भगवान गोयल ने बताया कि दोषी सतनाम पहले भी नशे के एक दूसरे केस में दोषी है, जो जमानत पर चल रहा था। इसे पुलिस ने दोबारा 10 किलो 200 ग्राम भुक्की रखने का दोषी पाया है। सितंबर 2019 में पुलिस को सूचना मिली थी कि दोषी घर में बाड़े में नशा बेचने का काम करता है। इसके बाद पुलिस कर्मचारियों ने आला अधिकारियों को बुलाकर मौके से कब्जे में लिए गए नशे का वजन किया, जो 10 किलो 200 ग्राम था। इसके सैंपल मधुबन लैब में भेजा गया। अदालत में करीब चार साल दोनों पक्षों की तरफ से दी गई दलील के बाद संगीता राय सचदेव की अदालत ने सतनाम सिंह को दोषी पाते हुए चार साल की कैद व डेढ़ लाख रुपये की जुर्माना की सजा सुनाई है।
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डोडा पोस्त रखने पर एक साल की कैद व 25 हजार जुर्माना

दूसरे मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संगीता राय सचदेव की अदालत ने डोडा पोस्त रखने के मामले में एक युवक को एक साल की कैद और 25 हजार रुपये की जुर्माने की सजा सुनाई है।
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जुर्माना न देने की स्थिति में दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। उप जिला न्यायवादी जय भगवान गोयल ने बताया कि चीका थाने में बिरथे बारी रोड चीका निवासी 30 वर्षीय नरेश कुमार के खिलाफ एक किलो 250 ग्राम डोडा पोस्ट रखने के आरोप में जून 2020 में मामला दर्ज़ किया गया था। अदालत में तीन साल की सुनवाई के बाद न्यायाधीश संगीता राय सचदेव ने दोनों पक्षों की दलीलों पर सुनवाई करते हुए आरोपी को नशा रखने का दोषी पाते हुए एक साल की सजा व 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायाधीश संगीता राय सचदेव ने फैसले के दौरान की गई टिप्पणी में कहा कि कि समाज में नशे को बढ़ावा देने वाला से व्यक्ति सजा माफी के योग्य नहीं हो सकता।
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