अब अध्यापकों की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पास करवाने तक नहीं है। जिस विषय में विद्यार्थी कमजोर है, उस विषय के बारे में जब तक विद्यार्थी को असली ज्ञान नहीं होता है तब तक उस अध्यापक को उन्हें पढ़ाना होगा। जिसे लेकर शिक्षा विभाग ने इस वर्ष स्कूलों में स्किल पासबुक कैचअप प्रोग्राम तैयार किया है। जिले के सभी स्कूलों को स्किल पासबुक प्रोग्राम का प्रफोरमा भेज दिया गया है। जिसमें पहली कक्षा के बच्चों से दूसरी कक्षा के अध्यापक एवं दूसरी कक्षा के बच्चों से तीसरी कक्षा के अध्यापक जानकारी हासिल करेंगे। बच्चे यदि स्किल पासबुक कैचअप प्रोग्राम में फेल हो गए तो उन्हें उसी कक्षा में क्लास लगानी होंगी, जिसे पास करके वे अगली कक्षा में आए हैं।
पहली से कक्षा नौवीं तक के विद्यार्थियों का जारी किया गया प्रफोरमा
शिक्षा विभाग ने स्किल पासबुक कैचअप प्रोग्राम के लिए कक्षा पहली से नौंवी तक प्रफोरमा जारी किया है। जिसमें बच्चों से विषय अनुसार प्रश्न किए जाएंगे। जिन विषयों में बच्चों की पकड़ नहीं मिलीं तो उन्हें फिर से पिछली कक्षा में ही क्लासें लगानी पड़ेंगी।
जून की छुट्टियों से पहले पूरा करवाना है सिलेबस
जो विद्यार्थी स्कूल पासबुक कैचअप प्रफोरमा में फेल होगा। उन विद्यार्थियों को फिर से वही सिलेबस पढ़ाने के लिए गर्मी की छुट्टियों से पहले क्लासें लगानी होंगी। इसके बाद फिर उनकी परीक्षा होगी। उसमें पास होने पर ही उसे पूरी तरह से अगली कक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा।
जिले के 599 स्कूलों मेें स्किल पासबुक कैचअप प्रोग्राम के तहत प्रफोरमा भेजा जा चुका है। इस योजना का मुख्य मकसद बच्चों के ज्ञान को जांचना है। कई बार बच्चे का ज्ञान कक्षा के अनुसार नहीं मिलता। इसी बात को जांचने व बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए यह योजना है। अगर किसी विषय में विद्यार्थी फेल होता है तो उस विद्यार्थी की करीब डेढ़ महीने तक कक्षाएं उस विषय की लगाई जाएंगी। जो उसने पिछली कक्षा में पढ़ा है। कक्षा पहली के विद्यार्थियों के ज्ञान की जांच दूसरी कक्षा को पढ़ाने वाले अध्यापक करेंगे।
शमशेर सिरोही, जिला उप शिक्षा अधिकारी