शैक्षणिक सत्र के अंतिम महीनों में जहां आप अपने बच्चे की स्कूल शुरू करवाने या फिर अपने बच्चे की अगली कक्षा में दाखिले व किताबें खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं कई पुस्तक प्रकाशक कई स्कूल संचालकों के साथ कथित लूट के लिए गठजोड़ बनाने में जुटे हुए हैं। पुस्तक प्रकाशकों के साथ डील तय होने के बाद पुस्तक विक्रेता का नाम तय होगा और शुरू हो जाएगी आपसे खुली व सरेआम लूट। हर साल किताबों के नाम पर होने वाले इस खेल का खुलासा कुछ पुस्तक विक्रेताओं ने ही किया है।
अभी कक्षाओं में बदली जाने वाली पुस्तकों की हो रही है लिस्ट तैयार
कई स्कूलों के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निजी स्कूल संचालक इस समय कक्षा अनुसार लिस्ट तैयार कर रहे हैं कि कौन से विषय की पुस्तक बदलनी हैं। वैसे तो कुछ निजी स्कूलों को छोड़कर अधिकतर स्कूल संचालक हर साल पुस्तक बदलते हैं। लेकिन कई लोगों द्वारा विषय अनुसार किस प्रकाशक के साथ सांठ-गांठ में ज्यादा कमाई होगी, इसके लिए तैयारी की जा रही है। सबसे पहले स्तर पर कक्षा अनुसार बदली जाने वाली पुस्तकें, उनके स्थान पर किस प्रकाशक की पुस्तक लगेगी, यह तय किया जा रहा है। हालांकि सभी स्कूल संचालक ऐसे नहीं हैं। कई स्कूलों में गुणवत्तायुक्त पुस्तकों को प्राथमिकता देते हुए लागू करवाया जाता है।
लिस्ट बनने के बाद तय होगा शहर में एक पुस्तक विक्रेता का नाम
नाम ना छापने की शर्त पर एक पुस्तक विक्रेता ने बताया कि जब किसी स्कूल की लिस्ट तैयार हो जाएगी और प्रकाशक के साथ साठ-गांठ तय हो जाएगी। तो फिर शहर में एक पुस्तक विक्रेता का चयन किया जाएगा। संबंधित स्कूल की सभी कक्षाओं की और संबंधित प्रकाशक की पुस्तकें केवल उसी पुस्तक विक्रेता के पास मिलेगी। जिसे अभिभावकों को मजबूरन मनमानी कीमतों पर खरीदना होगा।
क्लास टीचर से लेकर स्कूल संचालक तक का तय हो रहा है कमीशन
स्कूल सूत्रों ने बताया कि कई स्कूल तो ऐसे हैं, जहां क्लास टीचर व प्रिंसिपल का 10 से 15 प्रतिशत, स्कूल संचालक 30 से 40 प्रतिशत और पुस्तक विक्रेता 5 से 10 प्रतिशत तक का कमीशन तय हो जाता है। इस तरह से पुस्तक खरीदने पर जो डिस्काउंट अभिभावकों को मिलना चाहिए, वह पहले ही बंट जाता है और अभिभावकों को मजबूरी में ज्यादा महंगे दामों पर पुस्तकें खरीदनी पड़ती हैं।
पुस्तक विक्रेता काट रहे हैं स्कूलों के चक्कर
शहर में एक अन्य पुस्तक विक्रेता ने बताया कि इस समय स्कूलों में अगले सत्र की पुस्तकों की लिस्ट तैयार की जा रही है। वे कई स्कूलों में गए हैं लेकिन उन्हें उन पुस्तकों की जानकारी नहीं दी जा रही, जो आने वाले सत्र में लागू की जानी हैं। जिसका कारण स्पष्ट है। जब स्कूल संचालक व स्कूल मुखिया की प्रकाशक के साथ बातचीत तय हो जाएगी। इसके बाद पुस्तक विक्रेता का नाम तय होगा। उसी को संबंधित पुस्तकों की लिस्ट दी जाएगी। ताकि वह अपनी दुकान पर उन पुस्तकों को ला सके।
अभिभावकों को दें कहीं से भी खरीदने की छूट
अभिभावक राजेंद्र कुमार, रमेश कुमार, रामदिया चावरिया, धर्मबीर सहित अन्य ने कहा कि स्कूल संचालक केवल एक पुस्तक विक्रेता से पुस्तकें खरीदने पर मजबूर करते हैं। जबकि होना यह चाहिए कि केवल पुस्तक का नाम बता दिया जाए। अभिभावक उसे जहां से अच्छी गुणवत्ता की व अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिले, वहां से खरीद सके। सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
काफी स्कूलों में गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए पुस्तकें लगवाई जाती हैं। यदि किसी अभिभावक को परेशानी है तो वह संबंधित अथॉरिटी में शिकायत दे सकता है। स्कूल संचालक शिक्षा का उजियारा फैलाने के लिए बच्चों को अधिक से अधिक गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। अभिभावकों से लूट जैसी कोई बात नहीं है। अभिभावक अपने बच्चों के लिए अच्छी पुस्तकें व अच्छा स्कूल खुद चुनते हैं। उन्हें कोई मजबूर नहीं करता। ना ही कोई स्कूल संचालक ऐसा कर सकता।
बलविंद्र सिंह संधु, अध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक वेलफेयर एसोसिएशन