संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हजारों करोड़ के वैट घोटाले में मंगलवार को कैथल में ईडी की टीम ने दबिश दी। इस दौरान ईडी की टीम में शामिल 10 सदस्यों ने सेक्टर-19 में स्थित आरोपी तत्कालीन ईटीओ अशोक सुखीजा के निवास पर पहुंचकर जांच की। टीम के सदस्य सुबह 11 बजे ही पूर्व अधिकारी के निवास स्थान पर पहुंच गए थे। इसके बाद देर शाम तक जांच जारी रही।
गौरतलब है कि मामले में रघुवीर सिंह शिकायकर्ता हैं, जिन्होंने वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार की शिकायत दी थी। आरोपी तत्कालीन ईटीओ अशोक सुखीजा वर्ष 2011 में सिरसा में ईओ के पद पर कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने 300 करोड़ रुपये का घोटाला किया था। इसके साथ इस मामले में कैथल में भी करीब 18 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था।
शिकायकर्ता रघुवीर सिंह ने बताया कि उन्हें वर्ष 2007 में जानकारी मिली कि आबकारी एवं कराधान विभाग में बड़े स्तर पर घोटाला हो रहा है। इसके बाद उन्होंने शिकायत दी थी। उनकी शिकायत पर 2011 के बाद तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद वर्ष 2016 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में केस गया। उनके केस की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया कर रहे हैं। मंगलवार को केस में सुनवाई थी, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्हें जानकारी मिली कि सिरसा में नौ जगह पर ईडी ने दबिश दी है। इसके साथ ही कैथल में भी ईडी की टीम जांच करने के लिए पहुंची है। उन्होंने बताया कि इस मामले में 66 अधिकारी आरोपी हैं। मामले में उन्हें कई बार मुख्यमंत्री आवास पर तो बुलाया गया, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला, कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने बताया कि सिरसा में जहां 300 करोड़ रुपये का घोटाला था। वहीं, सोनीपत में भी यह घोटाला किया गया है। आरोप है कि प्रदेशभर में करीब 10 हजार 618 करोड़ रुपये का वैट घोटाला किया गया है।
बर्खास्त होने के बाद भी की बोगस बिलिंग-
शिकायकर्ता रघुवीर सिंह ने बताया कि इस मामले में आरोपी तत्कालीन ईटीओ अशोक सुखीजा ने मामले में बर्खास्त होने के बावजूद उनके कार्यालय के सहायकों के माध्यम से बोगस बिलिंग की। इसके बावजूद सरकार कुछ नहीं कर पाई। उन्होंने शिकायत देने के शुरुआत में ही ईडी या सीबीआई से जांच करवाने की मांग की, लेकिन उस समय जांच नहीं की गई।