संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर की सड़कों पर दौड़ रहे बेलगाम ई-रिक्शा अब यातायात व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। बाजारों और प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा चालकों की मनमानी के चलते रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। वे ट्रैफिक नियमों और कानूनों की परवाह नहीं करते जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नियमों की खुलेआम अनदेखी से न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
सर्दी के मौसम में चालान के डर से कई ई-रिक्शा चालक अपने वाहनों की नंबर प्लेट कपड़े या अन्य साधनों से ढक लेते हैं। कुछ चालक नंबर प्लेट को मोड़ देते हैं या उस पर मिट्टी जमा कर पहचान छुपाने का प्रयास करते हैं, ताकि नियमों के उल्लंघन पर उनकी पहचान न हो सके। यह सीधे तौर पर मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई न होने से चालकों के हौसले बुलंद हैं।
शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और आंतरिक सड़कों पर ई-रिक्शा बेतरतीब ढंग से खड़े नजर आते हैं। सवारी भरने के लिए सड़क के बीचों-बीच वाहन रोक देना आम हो गया है। इससे पीछे से आ रहे वाहनों को अचानक रुकना पड़ता है, जिससे जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। इसके अलावा कई चालक गलत दिशा में ई-रिक्शा चलाते हुए भी दिखाई देते हैं, जो न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि जानलेवा हादसों को भी न्योता देता है।
पीक ऑवर में हालात और बिगड़े
सुबह और शाम के व्यस्त समय में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। छात्रावास रोड, बस स्टैंड, गीता भवन, पुराना बस स्टैंड और कबूतर चौक जैसे क्षेत्रों में लंबे जाम लगना आम हो गया है। इससे वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्कूल जाने वाले छात्र, कार्यालय कर्मचारी और अस्पताल पहुंचने वाले मरीज समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और यातायात पुलिस सख्ती से नियमों को लागू करे, नियमित चेकिंग अभियान चलाए और ई-रिक्शा चालकों को केवल निर्धारित स्थानों पर ही सवारी भरने के निर्देश दे, तो समस्या काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती है। लोगों में महेंद्र सिंह और मनीष गुर्जर ने मांग की है कि अव्यवस्थित ई-रिक्शा संचालन पर जल्द ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था दोबारा सुचारु हो सके।