संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत/कसान। जो नशा कभी शहरों तक सीमित माना जाता था, वह अब गांव-गांव तक जड़ें जमा चुका है। चिट्ठा, स्मैक और इंजेक्शन जैसे घातक नशों की ग्रामीण इलाकों में आसान उपलब्धता बताती है कि यह समस्या गंभीर सामाजिक संकट बन चुकी है। यह बात पुलिसकर्मी सुनील संधू ने कही।
जिले के गांव कैलरम में पुलिसकर्मी सुनील संधू अपनी नशा मुक्ति टीम के साथ जागरूकता अभियान चला रहे थे। टीम ने गांव के सार्वजनिक स्थलों—श्मशान घाट, महर्षि वाल्मीकि मंदिर परिसर तथा हर्बल पार्क का निरीक्षण किया। निरीक्षण दौरान इन जगहों से नशे के सेवन के स्पष्ट सबूत बरामद हुए, जिनमें टीके लगाने के लिए इस्तेमाल की गई सिरिंजें और स्मैक के रोल शामिल हैं। ये वस्तुएं प्रमाणित करती हैं कि गांव में नशे की युवाओं तक पहुंच कितनी सहज हो चुकी है।
पुलिसकर्मी सुनील संधू ने ग्रामीणों से अपील की कि नशे के प्रति सजग रहें तथा बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें।