संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल, कलायत। दीपावली की तिथि पर भ्रम में न पड़ें क्योंकि दीपों का पर्व प्रदोषव्यापिनी अमावस्या में मनाया जाता है। इसमें उदया तिथि का कोई भी लेना-देना नहीं होता। इस बार अमावस्या की शुरुआत 31 अक्तूबर को सूर्यास्त के साथ ही प्रदोष काल हो रहा है, जो एक नवंबर को शाम 6:16 बजे तक है। ऐसे में अमावस्या की तिथि 31 अक्तूबर को मानी जाएगी और इसी दिन दिवाली मनाई जाएगी।
यह बात पंडित विशाल शांडिल्य ने कही। उन्होंने बताया कि दिवाली हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। अमावस्या की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बताकर कई लोग एक नवंबर को दिवाली मनाने की बात कर रहे हैं लेकिन तिथि के अनुसार देखें तो 31 अक्तूबर को दीपावली का पर्व मनाना श्रेष्ठकर रहेगा क्योंकि उस शाम अमावस्या का चांद दिखाई देगा। इस दिन लक्ष्मी पूजा भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार 31 अक्तूबर को अमावस्या तिथि दिन में दो बजकर 40 मिनट से लग रही है। इस कारण से दिवाली 31 अक्तूबर को मनाई जाएगी। त्योहार पर रात्रि में अमावस्या तिथि होनी चाहिए जो एक नवंबर 2024 को शाम के समय नहीं है। ऐसे में दिवाली का त्योहार 31 अक्तूबर को मनाया जाएगा। लक्ष्मी पूजन सूर्यास्त के बाद किया जाता है जब चंद्रमा आकाश में दिखाई देता है इसलिए 31 अक्तूबर 2024 दिवाली मनाने के लिए आदर्श दिन होगा।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। इस साल धनतेरस 29 अक्तूबर को होगा। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण और नए बर्तन खरीदने की परंपरा है। भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में मनाए जाने वाले इस दिन माता लक्ष्मी और गणेशजी की पूजा की जाती है।
छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है 30 अक्तूबर को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन हनुमानजी की जयंती भी होती है। इस दिन दक्षिण दिशा में यम देवता के नाम का दीया जलाने की परंपरा है।
मुख्य दिवाली मनाने के लिए अमावस्या की तिथि 31 अक्तूबर को दोपहर 3: 52 बजे से शुरू होगी और एक नवंबर को शाम 6:16 बजे तक रहेगी। अमावस की रात 31 अक्तूबर के हिस्से आ रही है। यही वजह है कि दिवाली इसी रात को मानना उचित होगा। इस दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। रात में निशीथ काल पूजा का आयोजन होगा जो विशेष रूप से दिवाली के शुभ अवसर पर अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट
दिवाली के अगले दिन दो नवंबर को गोवर्धन पूजा की जाएगी। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है और अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। भाई दूज दिवाली का अंतिम दिन तीन नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं।