संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। गांव टटियाना, खराल, बदसुई, डंडौता, बोपुर, पपराला छन्ना अग्रियां, छन्ना जट्टां, अरनौली, लंडाहेडी, जोधवा में कृषि विकास अधिकारी ईश्वर ने वीरवार को अधिकारियों के साथ फ्लैग मार्च किया। इस मौके पर उन्होंने किसानों को समझाते हुए बताया कि पराली को जलाने से पर्यावरण प्रदूषण होने के साथ-साथ भूमि को भी नुकसान हो रहा है। इसलिए जरूरी है कि किसान पराली को न जलाए, बल्कि इसका प्रबंधन करें।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण स्वच्छता व स्वास्थ्य के लिए पराली का प्रबंधन बेहद ही जरूरी है। उन्होंने पराली प्रबंधन को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग व पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश को लेकर किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
बीटीएम डॉ. सचिन पंवार ने कहा कि इन सीटू व एक्स सीटू मशीनों की ओर से प्रबंधन किए जाने पर एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। कहा कि पराली को जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि भूमि की उर्वरा शक्ति भी खत्म होती है। इसलिए किसान पराली का प्रबंधन करें। इसके लिए प्रदेश सरकार अनुदान के रुप में सहयोग करती है। पराली प्रबंधन को किसान अपनी आय का स्रोत बना सकते हैं। फसल अवशेष के लिए किसानों की तरफ से हमें पूरा सहयोग मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि इन सीटू व एक्स सीटू मशीनों से प्रबंधन करने पर एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि लेने के किसान अपना रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर 30 नवंबर तक रजिस्ट्रेशन करवा सकता है। इस मौके पर बीटीएम चीका डॉ. सचिन पंवार,दलबीर सिंह, ग्राम सचिव परवेश नैन, फील्ड मेन ओम प्रकाश किसान नेता जसवंत सिंह भी मौजूद रहे।