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Kaithal News: ओटी में डॉक्टर, ओपीडी में कराहते रहे मरीज

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ओपीडी में खाली पड़ी हड्डी रोग विशेषज्ञ की कुर्सी। संवाद
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कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में सोमवार को हड्डी के मरीजों को इलाज के लिए घंटों डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। अस्पताल के एकमात्र हड्डी रोग विशेषज्ञ ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेशन करने में व्यस्त रहे। ओपीडी के बाहर मरीज दर्द से कराहते और डॉक्टर के आने का इंतजार करते नजर आए।
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पर्ची के साथ ओपीडी के बाहर डॉक्टर की अनुपलब्धता की सूचना चस्पा की गई थी। इसके बावजूद कई मरीज इस उम्मीद में बैठे रहे कि कुछ देर बाद विशेषज्ञ उन्हें देख लेंगे। घंटों इंतजार के बाद जब डॉक्टर के ओटी में होने और मंगलवार को आने के लिए कहा गया तो दूर-दराज से आए मरीजों को बिना इलाज ही लौटना पड़ा। जिला नागरिक अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में ड्यूटी सप्ताह में चार दिन रहती है। इनमें सोमवार और वीरवार को उनकी ऑपरेशन थियेटर में ड्यूटी लगाई जाती है। ऐसे में इन दोनों दिनों में हड्डी से संबंधित नए मरीजों को ओपीडी में विशेषज्ञ की सेवाएं नहीं मिल पातीं।
सोमवार को अस्पताल में पहुंचे मरीजों ने कहा कि वे कई किलोमीटर का सफर तय कर इलाज की उम्मीद में आए थे लेकिन यहां पहुंचने के बाद पता चला कि डॉक्टर ओपीडी में उपलब्ध नहीं हैं। बीच-बीच में अस्पताल का अटेंडेंट मरीजों को स्थिति समझाकर वापस जाने के लिए कहता रहा लेकिन दर्द से परेशान मरीज डॉक्टर के आने की उम्मीद में बैठे रहे।
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20 के बाद जिला अस्पताल में नहीं होगा एक भी हड्डी रोग विशेषज्ञ
अस्पताल में वर्तमान में तैनात एकमात्र हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु बंसल ने 21 अगस्त को इस्तीफा दे दिया था। वह फिलहाल नोटिस पीरियड पर हैं, जो 20 सितंबर को पूरा हो जाएगा। इसके बाद जिला नागरिक अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद खाली हो जाएगा। अभी सप्ताह में चार दिन किसी तरह मरीजों को विशेषज्ञ की सेवाएं मिल रही हैं लेकिन उनके जाने के बाद हड्डी के मरीजों के सामने सरकारी अस्पताल में इलाज की सुविधा के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

हर माह 35 से 40 ऑपरेशन, सबसे ज्यादा घुटने-कूल्हे के
जिला नागरिक अस्पताल में हर माह हड्डी से संबंधित करीब 35 से 40 ऑपरेशन किए जाते हैं। इनमें घुटने और कूल्हे के रिप्लेसमेंट के अलावा फ्रैक्चर और अन्य हड्डी संबंधी ऑपरेशन शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई माह पहले निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत घुटने और कूल्हे के रिप्लेसमेंट जैसे ऑपरेशन बंद किए जा चुके हैं। ऐसे में आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए सरकारी अस्पताल ही इन महंगे ऑपरेशनों का प्रमुख सहारा बना हुआ है। विशेषज्ञ के जाने के बाद यदि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो इन मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। खासकर घुटने और कूल्हे के रिप्लेसमेंट जैसे महंगे उपचार आम मरीज के लिए निजी अस्पताल में करवाना आसान नहीं है। वहीं गंभीर दुर्घटना के मामलों और लंबे समय से हड्डी की समस्या से जूझ रहे मरीजों को भी विशेषज्ञ सेवाओं के अभाव में दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ सकता है।

30 किलोमीटर दूर से आए, डॉक्टर नहीं मिले
गुहला क्षेत्र के गांव भागल निवासी अमरीक सिंह गिरने के कारण घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनके कूल्हे और बाजू में फ्रैक्चर है। दर्द से परेशान अमरीक सिंह करीब 30 किलोमीटर दूर से नि:शुल्क इलाज की उम्मीद में जिला नागरिक अस्पताल पहुंचे थे। यहां आने के बाद उन्हें पता चला कि हड्डी रोग विशेषज्ञ ओटी में व्यस्त हैं। इलाज नहीं मिल पाने के कारण उन्हें मंगलवार को दोबारा अस्पताल आने के लिए कहा गया।

बुजुर्ग बोले- सोमवार को ओपीडी में होना चाहिए डॉक्टर
गांव दुमाड़ा निवासी बुजुर्ग सुखबीर सिंह पैरों में तेज दर्द के कारण अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि वह पहले ही काफी मुश्किल से अस्पताल तक पहुंचे लेकिन घंटों इंतजार के बाद पता चला कि डॉक्टर ओपीडी में नहीं आएंगे। उन्हें मंगलवार को आने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि सोमवार को ओपीडी का दिन रखा जाना चाहिए, क्योंकि मरीज इसी उम्मीद में अस्पताल पहुंचते हैं कि सप्ताह के पहले दिन डॉक्टर उपलब्ध होंगे।


मुख्यालय को डॉक्टर की कमी के बारे में लिखा
सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने कहा कि हड्डी रोग विशेषज्ञों की कमी के लिए मुख्यालय को कई बार लिखा जा चुका है। जल्द नए डॉक्टर मिलने की उम्मीद है। यदि आने वाले दिनों में कैथल को हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं मिलता है तो वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।

ओपीडी में खाली पड़ी हड्डी रोग विशेषज्ञ की कुर्सी। संवाद

ओपीडी में खाली पड़ी हड्डी रोग विशेषज्ञ की कुर्सी। संवाद

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