कैथल। स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से पत्र लिखने के बाद भी सरकारी व निजी अस्पतालों के डॉक्टर विभाग के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों के द्वारा अभी भी पुराने ढर्रे पर ही काम किया जा रहा है। डॉक्टरों की तरफ से मरीजों की दवाई के लिए बनाई जाने वाली पर्चियों को समझना आम आदमी की समझ से बाहर है।
अस्पताल में दवाई लेने के लिए आ रहे मरीजों को डॉक्टरों की लिखाई समझ में ही नहीं आ रही है। कई बार तो फार्मासिस्ट को भी लिखावट समझ में नहीं आती, जिससे दवा देने में भ्रम की स्थिति बन जाती है। परिणामस्वरूप मरीजों को या तो बार-बार काउंटर पर आना-जाना पड़ता है, या फिर गलत दवा मिलने का जोखिम बढ़ जाता है। जबकि सरकारी स्पष्ट आदेश दे चुकी है कि दवा की पर्ची पर दवा या साल्ट का नाम बड़े अक्षरों में लिखा जाए ताकि उसे हर कोई समझ सके। सरकार ने ये आदेश डाक्टरों द्वारा अस्पताल से बाहर की दवा लिखने की शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए जारी किए थे।
कुछ समझ नहीं आता
जिला नागरिक अस्पताल में दवा लेने आए एक मरीज अनिल कुमार ने बताया कि डॉक्टर ने जो दवा लिखी, उसे समझने में न मुझे कुछ दिखा, न मेडिकल स्टाफ को। आखिरकार फार्मासिस्ट को जाकर पूछना पड़ा कि आखिर क्या लिखा गया है। इसी तरह एक अन्य मरीज की बेटी ने बताया कि उन्होंने पर्ची की तस्वीर मोबाइल में खींचकर बाहर की मेडिकल दुकान पर दिखाई तो वह समझ में ही नहीं आई, जिसके चलते उनको दोबारा से पर्ची लिखवानी पड़ी।
समाधान को कदम उठाए प्रबंधन
जिला नागरिक अस्पताल में दवाई लेने आए मरीजों और तीमारदारों ने मांग की है कि विभाग को इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाने चाहिए और डॉक्टरों को टाइप्ड या कंप्यूटरीकृत पर्चियां देने की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे न केवल मरीजों को सुविधा मिलेगी बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
जिला नागरिक अस्पताल के पीएमओ डॉक्टर दिनेश कंसल ने बताया इस संदर्भ में डॉक्टरों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सभी डॉक्टरों को स्पष्ट शब्दों में ही पर्ची बनाने के लिए कहा गया है। अगर फिर भी इस तरह की कोई शिकायत आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों की पर्ची पर लिखे दवाईयों के अस्पष्ट नाम।- फोटो : samvad
डॉक्टरों की पर्ची पर लिखे दवाईयों के अस्पष्ट नाम।- फोटो : samvad