संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिवाली पर हुई आतिशबाजी के बाद ‘प्रदूषण बम’ फूट गया। धमाकों का नतीजा...जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स ः एक्यूआई) 270 के पार पहुंच गया है। मंगलवार को यह 273 दर्ज किया गया। यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक श्रेणी में आंका जाता है।
लोगों का कहना है कि दिवाली की रौनक अब शहर के लिए धुएं और प्रदूषण का कारण बन गई है। आतिशबाजी के चलते शहर की हवा खतरनाक स्तर तक दूषित हो गई। मंगलवार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 273 के पार पहुंच गया। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन ने पटाखे जलाने का समय रात 8 से 10 बजे तक निर्धारित किया था, लेकिन इसके बाद भी देर रात तक पटाखे फोड़े गए। इसके चलते प्रदूषण तेजी से बढ़ गया। सोमवार दोपहर शहर का एक्यूआई 145 था, जो रात तक 250 के पार पहुंच गया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार एक्यूआई 275 दर्ज किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार यह स्तर सांस संबंधी बीमारियों वाले लोगों के लिए अत्यंत खतरनाक है।
शहर के सेक्टर 12, सेक्टर 18 और पुराना बस स्टैंड के आसपास लोग सैर के दौरान मास्क पहने नजर आए। बाजारों में चहल-पहल तो रही, लेकिन धुएं और धूल ने दिवाली के बाद का माहौल धुंधला बना दिया। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों पर इसका सबसे अधिक असर देखा जा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि रातभर पटाखे फोड़ने से हवा में पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) का स्तर बढ़ गया। फायर ब्रिगेड सड़क किनारे लगे पेड़ों पर पानी की बौछार करेगी ताकि धूल और धुएं का असर कम किया जा सके।
सलाह ः सांस के मरीज घर से कम निकले
सिविल अस्पताल के डॉ. नेहा बंसल ने कहा कि अगर अगले दो दिन तक दिवाली पर चले पटाखों के प्रदूषण का असर रहेगा। उन्होंने कहा कि सुबह-शाम जो सैर या दौड़ लगाने जाते है उनको कोई समस्या हो तो वह जाने से बचें। नगर निगम ने भी सड़कों पर साफ-सफाई का कार्य शुरू कर दिया है। जिससे धूल और धुएं का असर कम हो सके। दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि मौसम में परिवर्तन और फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ता है। किसानों से अपील है कि वे फसल अवशेषों में आग न लगाएं और पर्यावरण को साफ सुथरा बनाने में योगदान दें।
उन्होंने लोगों से कहा है कि कचरे के ढेर में आग न लगाएं। वृक्षों पर पानी का छिड़काव करें। भवन निर्माण सामग्री को ढककर रखें। कहीं आग लगी दिखे तो उस पर पानी डाल दें।