संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। सरकारी अस्पताल को जाने वाले मार्ग पर सीवरेज का गंदा पानी लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का सबब बना है। इस पुराने मार्ग पर एक मंदिर, मिनी बैंक व धर्मशाला भी है जिसमें सैकड़ों लोगों का रोज निकलना रहता है। साईं मंदिर के पुजारी रमेश कौशिक का कहना है कि मंदिर के सामने गली में एक एक फुट तक सीवरेज का गंदा पानी खड़ा रहता है।
पिछले करीब 15 दिनों से जमा हुए इस पानी में इतना दुर्गंध है कि बिना नाक को ढंके यहां से निकला ही नहीं जा सकता। मंदिर, बैंक या अस्पताल में जाने वाले लोग इस समस्या को लेकर परेशान हैं। उन्होंने बताया की सीवरेज ओवरफ्लो होकर गंदा पानी मेनहोल से बाहर आकर जमा हो रहा है।
इतना ही नहीं इस मार्ग पर मरे कुत्ते के कारण बदबू इतना अधिक है कि लोगों का निकलना तक मुश्किल है। इस समस्या के संदर्भ में वे नगर पालिका व जनस्वास्थ्य विभाग में बार बार संपर्क कर चुके हैं, लेकिन चार दिनों से न तो मरा हुआ कुत्ता उठाया गया और न ही गंदे पानी से बचाव का कोई उपक्रम हुआ। बलजीत सिंह नायक ने कहा कि जो मरीज अस्पताल में इलाज के लिए जाते हैं उनको गंदे पानी से निकलने में और बीमारी हो रही हैं। एक तरफ तो स्वास्थ्य विभाग डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए घरों में जाकर मच्छरों को चेक करता है पर उसे गली में गंदे पानी में मच्छरों का जमावड़ा नहीं दिखता। नायक का कहना है कि मंदिर या गुरुद्वारा में जाने से पहले पांव धोने के लिए शुद्ध जल का भराव रहता है पर यहां मंदिर में जाने से पहले गंदे व सड़े पानी से निकलना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा पहलू यह भी है कि द्रोणाचार्य चौक पर संत महात्माओं की मूर्तियां लगाई गई हैं और उनके सामने लगातार सीवरेज का गंदा पानी सनातन संस्कृति को दूषित कर रहा है। इस मामले में उन्होंने उपायुक्त को भी शिकायत भेजी है। तेजा राम, रमेश कौशिक, राजबीर सिंह, बलजीत सिंह आदी ने कहा कि यदि विभाग इस समस्या का तुरंत प्रभाव से निराकरण नहीं करता तो मजबूरन लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ इंद्राज सिंह ने बताया कि कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया है और मोटर लगाकर पानी निकाला जा रहा है। जल्द ही समस्या का समाधान होगा। नगर पालिका सचिव पवन शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही मृत कुत्ते के शव को हटाकर दफनाने की व्यवस्था कर दी
गई है।