कैथल। करीब 18 से 20 हजार की आबादी और 10 से 11 हजार मतदाताओं वाले धनौरी गांव में संत भगत जयंती पर भाईचारा दिख रहा है। करीब 3500 घरों में से हर घर से दान, खाद्य सामान व आदमी भेजकर आयोजन को सफल बनाने का जिम्मा उठाया हुआ है।
भाईचारे की मिसाल का हाल है कि गांव में कोई चंदा उगाही नहीं की गई। पूरे गांव ने अपनी इच्छा से इस आयोजन के लिए खाने-पीने का सामान, दान व हर घर से आदमी भेजकर अपनी इच्छा से अतिथिगणों के स्वागत का काम किया है।
गांव के किसी आयोजन में पहली बार कोई उपराष्ट्रपति पहुंच रहे हैं। समारोह की तैयारी के मद्देनजर गांव के लगभग 100 से अधिक बुजुर्ग व गणमान्य व्यक्ति संत धन्ना भगत के दो मंदिरों में चल रहे आयोजन की निगरानी किए हुए हैं।
गांव में संत धन्ना भगत का एक पुराना मंदिर है। जहां लगातार भंडारा चल रहा है। वहीं मुख्य आयोजन स्थल के निकट भी एक मंदिर है। यहां भी लगातार भंडारा चल रहा है। पानी, चाय व अन्य जरूरतों का भी ध्यान रखा जा रहा है। पुलिस कर्मचारी हों या अन्य विभागों के कर्मचारी, सभी के लिए गांव में भोजन की व्यवस्था की गई है। समूचे प्रोटोकॉल में तीन ग्रीन रूम भी बनाए हैं। संत धन्ना भगत के जीवन के बारे में जानकारी देते पैनल बोर्ड और होर्डिंग भी लगवाए गए हैं।
गांव वासी बलबीर, सतबीर मिस्त्री, प्रेम सिंह, रमेश व अन्य ने बताया कि गांव के 36 बिरादरी इस आयोजन में खुशी से शामिल है। उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री मनोहर लाल समारोह के आने से पहले ही गांव को जोड़ने वाली सभी सड़कों की मरम्मत हो गई है। गांव में साफ-सफाई चकाचक कर दी है। जनस्वास्थ्य विभाग ने पेयजल पाइपलाइन ठीक कर दी हैं। बिजली की लाइनें ठीक कर दी हैं। उनके आने से पहले ही इतना काम हो। उनके आने से तो गांव को काफी लाभ होगा। गांव धनौरी में करीब 35 मंदिर हैं। सभी बिरादरियों की चौपाल हैं।