संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे पद्मनाभा एकादशी भी कहते हैं। इस व्रत को श्रेष्ठतम माना गया है।
उन्होंेने कहा कि पद्मनाभा एकादशी के सभी उपवासों में देवशयनी एकादशी व्रत श्रेष्ठतम कहा गया है। इस व्रत को करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा सभी पापों का नाश होता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करने का महत्व होता है क्योंकि इसी रात्रि से भगवान का शयन काल आरंभ हो जाता है, जिसे चातुर्मास या चौमासा का प्रारंभ भी कहते हैं। यह विचार महंत विश्वनाथ गिरी ने सीवन में समाज सेवी नित्यम के निवास पर आयोजित एक धार्मिक चर्चा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य-प्रताप से जातक को सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। धार्मिक मत है कि देवशयनी एकादशी के दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि चतुर्मास में आध्यात्मिक कार्यों के साथ पूजा-पाठ का विशेष महत्व बताया गया है। चतुर्मास में सावन (श्रावण मास) के महीने को सर्वोत्तम मास माना गया है। श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित होता है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती धरती पर भ्रमण करने निकलते हैं और इस दौरान पृथ्वी लोक के कार्यों की देखभाल भगवान शिव ही करते हैं। अब से चार मास तक पृथ्वी सहित सभी लोकों की देखभाल भगवान शिव के हाथों में होना माना जाता है। चतुर्मास में जरूरतमंद व्यक्तियों को दान देने से भगवान प्रसन्न होते हैं।
इस अवसर पर उनके साथ महंत धीर पुरी भी मौजूद थे। इस आयोजन में शालिनी, ऊषा चौधरी, राज रानी, सुभाष गर्ग, भीषू चौधरी, अदिति, शिल्पा, दीपिका व अन्य ने भाग लिया।