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Kaithal News: श्रद्धालुओं ने मंदिरों में की मां महागौरी की पूजा, गूंजे जयकारे

Wed, 01 Oct 2025 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। श्रद्धालुओं ने अष्टमी पर्व पर मां महागौरी की पूजा की। इस दौरान मंदिरों में माता के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी रही और जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे। वहीं घरों में श्रद्धालुओं ने नवरात्र के आठवें दिन व्रत का पारण किया और कन्याओं को भोजन करवाया। महिलाओं ने कन्याओं को उपहार भी प्रदान किए।
मंदिर के पुजारी संजय गौतम ने बताया कि मां महागौरी को मां पार्वती भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि आश्विन मास के नवरात्र के दौरान अनेक श्रद्धालु अखंड जोत प्रज्ज्वलित कर विशेष पूजा अर्चना करते है। उन्होंने कहा कि मां के अंग जहां जहां भी पड़े वहीं पीठ की स्थापना की गई जिसके चलते भारत में मां 51 शक्तिपीठों के रूप में विद्यमान है। उन्होंने बताया कि इन शक्तिपीठों में ही मां की पूजा की जाती है। उन्होंने बताया कि आठवे नवरात्र पर मां महागौरी और नौवे नवरात्र पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां महागौरी को देवी पार्वती का 16 वर्षीय अविवाहित रूप माना गया है। इसके अलावा मां को गिरी पर्वत की बेटी भी कहा जाता है। केवल अपनी दृष्टि मात्र से मां बुरी शक्तियों को परास्त करने की क्षमता रखती हैं। इसके साथ ही महागौरी देवी सुंदरता का भी प्रतिनिधित्व करती है और व्यक्ति की सभी इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। पौराणिक मान्याताओं के अनुसार राहु ग्रह को नियंत्रित करने वाली देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए गर्मी, सर्दी और बरसात का बिना परवाह किए कठोर तप किया था जिसके कारण उनका रंग काला हो गया था। उसके बाद शिव जी उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए और गंगा के पवित्र जल से स्नान कराया। इसके बाद देवी का रंग गोरा हो गया। तब से उन्हें महागौरी कहा जाने लगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी महागौरी की पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
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पूजन के लिए कंजकाओं की रही कमी

दुर्गा अष्टमी पर कंजका पूजन के लिए कन्याओं की भारी कमी देखने को मिली। छोटी छोटी कंजकाओं को लिए श्रद्धालु सुबह से ही परेशान रहे। स्कूल के देरी से लगने के कारण भी श्रद्धालुओं को कंजका भोजन करवाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। आमतौर पर कंजकाओं की कमी के कारण श्रद्धालु स्कूलों में जा कर ही कंजका पूजन कर उन्हें भोजन करवाते हैं। जो छोटी कंजकाओं की टोली थी उनके लिए लोग अपनी बारी की प्रतीक्षा में रहे।

30केएलटी46: कंजकाओं को भोजन करवाते श्रद्धालु
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