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श्रीराम से जुड़े 290 तीर्थों पर किए गए शोध देख सकेंगे श्रद्धालु

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45-कैथल। पत्रकारों को कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सदस्य। - फोटो : Kaithal
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कैथल। श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास द्वारा 51 वर्षों में भगवान श्रीराम से जुड़े भारत और नेपाल के 290 तीर्थ स्थलों पर किए गए शोध को दर्शाया जाएगा। इसके लिए रविवार को महाराजा अग्रसेन धर्मशाला में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी संस्थान के महामंत्री डा. रामअवतार ने अग्रसेन धर्मशाला में मीडिया से बातचीत में दी।
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उन्होंने बताया कि वे भगवान श्रीराम से जुड़े अयोध्या से जनकपुर तक 41 और अयोध्या से भगवान श्रीराम के वन गमन से जुड़े 249 तीर्थों पर 16 बार गए और आए हैं। इस दौरान पहाड़ों, जंगलों व अन्य दुर्गम इलाकों में जाना पड़ा। हर तीर्थ पर भगवान श्रीराम की चरण पादुकाएं स्थापित की गई हैं। इन तीर्थों के संबंध में विस्तृत वर्णन एक फिल्म में किया गया है, जिसे विभिन्न प्रदेशों से जुड़े विद्वान देखेेंगे। इन तीर्थाें की जानकारी पूरे प्रदेश में जाए, इस पर मंथन किया जाएगा। साथ ही तीर्थों के संबंध में प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कुछ लोगों में भ्रांतियां हैं कि तमिलनाडु में भगवान श्रीराम की पूजा नहीं होती, जबकि इस प्रदेश में 40 प्रतिशत लोगों के नाम में भगवान श्रीराम का नाम शामिल है। उन्होंने कहा कि रामायण के अनुसार रावण की लंका वह नहीं है, जिसे मौजूदा श्रीलंका कहा जाता है, यह दमन एवं दीव के आस-पास संभावित है। मौजूदा श्रीराम सेतु असली श्रीराम सेतु का एक भाग हो सकता है।
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इस अवसर पर राष्ट्रीय महामंत्री मनोज पाठक, जगदीश गोयल ट्रस्टी, कैथल जिला प्रधान मुकेश गर्ग, उप-प्रधान ऋषि गोयल, कोषाध्यक्ष सतपाल मंगला, सतनारायण गोयल, पवन गर्ग, शिव कुमार, भूषण गोयल, सुभाष बंसल, पार्षद विजय गोयल, निशीकांत शर्मा, सुरेश सिंगला, लाजपत सिंगला, बिट्टू गोयत, राजेश गेयल, गीता राम, कृष्ण लाल सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
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