संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कामना लेकर बाबा लदाना गांव स्थित बाबा राजपुरी डेरे में श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए हैं। इस तीन दिवसीय वार्षिक मेले का दशहरे के दिन आगाज होगा। यह मेला द्वादशी तक जारी रहेगा। मेले की सभी तैयारी पूरी कर ली गई हैं।
ग्रामीण जसबीर सिंह जस्सी, विक्की प्रजापति, कर्मवीर, नरेश व संदीप ने बताया कि दशहरे के दिन सुबह बाबा राजपुरी डेरे में हवन किया जाएगा और मंदिर प्रांगण में लगे जाल के पेड़ पर माता हिंगलाज देवी की ध्वजा चढ़ाई जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि दशहरे की रात को मां हिंगलाज जाल के पेड़ पर धागा बांधकर जाती हैं। उसके साथ मेले का शुभारंभ हो जाता है। तीनों दिन श्रद्धालु डेरे में पहुंचकर बाबा राजपुरी की समाधी पर दूध, घी, मक्खन, फल, फूल व प्रसाद चढ़ाकर धन-धान्य और पशुधन में वृद्धि की कामना करते हैं।
मेले के दूसरे दिन अर्थात एकादशी को श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा रहती है। इस दिन पुरुष श्रद्धालु बाबा को नमन करने के लिए पहुंचते हैं।
सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की कतारें मंदिर में लगी रहती हैं। द्वादशी को मेले में महिलाओं की संख्या ज्यादा रहती है। ग्रामीणों के अनुसार तीन दिन लगने वाले मेले में करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
मेले के दौरान हर वर्ष विशाल कुश्ती दंगल भी करवाया जाता है। इसमें हरियाणा सहित पंजाब, दिल्ली, हिमाचल, राजस्थान, उत्तराखंड व अन्य प्रदेशों से पहलवान भाग लेते हैं। विजेता पहलवानों को डेरा प्रबंधन की ओर से सम्मानित किया जाता है। वहीं मेले के तीनों दिन बाबा लदाना सहित आसपास के गांवों के लोगों द्वारा भंडारे भी लगाए जाते हैं।
सैकड़ों क्विंटल दूध चढ़ता है यहां
दशहरा से शुरू होने वाले इस मेले मेें पहले दिन से श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो जाते हैं। अगले दिन एकादशी से मेले की रौनक बढ़ जाती है जो द्वादशी तक रहती है। अंतिम दिन गांव की महिलाएं पूजा करती हैं। यहां पहुंचने वालों के लिए प्रसाद तैयार किया जाता है। तीन दिनों तक भंडारा चलता है।
दरअसल, बाबा राजपुरी पशु धन में लाभ के लिए प्रसिद्ध है। इसलिए तीन दिवसीय मेले मेें सैकड़ों क्विंटल दूध यहां चढ़ाया जाता है। इसी दूध से लोगों के लिए प्रसाद बना दिया जाता है। श्रद्धालुओं द्वारा बाबा राजपुरी डेरे में दूध, फल व मिठाइयों का प्रसाद चढ़ाकर धन-धान्य और पशुधन में सुख समृद्धि की कामना की जाती है।