कलायत। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर श्री कपिल मुनि तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। तडक़े भोर से ही श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचने लगे और विधि-विधान से स्नान कर दान-पुण्य किया।
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ अर्जित करने की कामना के साथ धार्मिक अनुष्ठान किए और मंदिर परिसर में माघ मास में चल रहे यज्ञ में आहुतियां डालीं। मंदिर पुजारी अनिरुद्ध गौतम ने श्रद्धालुओं को मौनी अमावस्या के महत्व बताया
उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या पर मौन रहना आत्मसंयम का प्रतीक है। यह दिन ऋषि मुनियों और तपस्वियों की तपस्या और साधना की स्मृति को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मनु ने अपने मौन व्रत का पालन किया था। इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन व्रत रहकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि कर पूरे दिन मौन रहकर उपवास करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। जो व्यक्ति इस समय गंगा स्नान या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन मौन रहकर किया गया पुण्य अनेक यज्ञों के समान फल देता है। शास्त्रीय परंपरा में कथा का विशेष स्थान है क्योंकि कथा से भाव, श्रद्धा और संकल्प दृढ़ होते हैं।
मौनी अमावस्या के दिन व्रत रखकर कथा का पाठ सुनने व पढ़ने मात्र से जीवन के कई संकट दूर होते हैं और पितरों की कृपा से सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। संवाद