संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका। श्रीराम कथा संचालन समिति की ओर से अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा का रविवार को विधिवत समापन हो गया। इस मौके पर हवन-यज्ञ एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने पहले हवन कुंड में आहुतियां डालीं और फिर भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर शहर के प्रमुख समाजसेवी बंतराम गोयल एवं उनकी धर्मपत्नी ने मुख्य यजमान के रूप में सहभागिता करते हुए पूजन संपन्न कराया। कथा व्यास स्वामी विज्ञानानंद महाराज ने उन्हें सम्मानित कर आशीर्वाद प्रदान किया। स्वामी विज्ञानानंद महाराज ने सात दिनों तक चली कथा के दौरान भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा और भक्ति भाव का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति मार्ग अपनाने और सत्कर्मों को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होता है और मानव जीवन में आत्मिक शक्ति का संचार होता है। इससे धार्मिक आस्था सुदृढ़ होती है तथा दुर्गुणों के स्थान पर सद्गुणों का विकास होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यज्ञ से देव शक्तियाँ प्रसन्न होकर श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।
स्वामी विज्ञानानंद महाराज ने शबरी प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे भगवान श्रीराम ने शबरी की श्रद्धा से दिए गए बेर प्रेमपूर्वक स्वीकार किए, वैसे ही भगवान सच्चे भाव से की गई भक्ति को स्वीकार करते हैं। उन्होंने रावण प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान की शरण में आने से महान से महान पापी का भी उद्धार संभव है। स्वामी विज्ञानानंद महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अयोध्या धाम की तरह वे भी अपने घरों में पर्व-त्योहारों पर दीप प्रज्वलन करें और सनातन परंपराओं को जीवंत रखें।