संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। चैत्र मास के चल रहे नवरात्र में कलायत के मां कात्यायनी शक्ति पीठ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कपिल मुनि मंदिर परिसर में मां कात्यायनी शक्ति पीठ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। शाम को भी मंदिरों में रौनक दिख रही है।
मां कात्यायनी के निमित्त हवन यज्ञ का आयोजन हुआ। मंदिर में दूर दराज से आकर श्रद्धालु मां की अखंड ज्योति जला कर पूरे नवरात्र मां की यहां रह कर पूजा भी करते हैं। किंवदंतियों के आधार पर मां कात्यायनी के नाम पर ही कलायत का नामकरण माना जाता है। अल सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होना शुरू होना शुरू हो जाती है जो पूरा दिन निर्बाध रूप से बढ़ती ही रहती है।
मंदिर के पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि कात्यायनी नवदुर्गा के नौ रूपों में छठवां रूप है। यह अमरकोष में पार्वती के लिए दूसरा नाम है। यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में उनका उल्लेख प्रथम किया है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थी। सिंह पर आरूढ़ होकर मां ने इसी रूप में महिषासुर का वध किया था। वे शक्ति की आदि रूपा है जिसका उल्लेख ग्रंथों में मिलता है। कालिका-पुराण में उल्लेख मिलता है जिसमें उड़ीसा में देवी कात्यायनी और भगवान जगन्नाथ का स्थान बताया गया है।
कात्यायन ऋषि कुल परंपरा में हुआ जन्म ः पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें।
मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं।
कात्यायनी के नाम पर कलायत पड़ा नाम ः मां कात्यायनी के नाम से ही कलायत का नामकरण माना जाता है। कात्यायनी का प्राचीनतम स्थान होने के कारण लोगों की मान्यता है कि कलायत व कात्यायनी एक दूसरे के पूरक हैं। हालांकि एक मत यह भी प्रबल है कि कलायत का नाम विष्णु के पांचवें अवतार भगवान कपिल के नाम पर हुआ है।
पीठ में स्थापित है दुर्लभ विग्रह ः मां कात्यायनी शक्ति पीठ के पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि शक्ति पीठ में स्थित मां का विग्रह अपने आप में अद्वितीय और दुर्लभ है। इस पीठ में मां का जो विग्रह है उस पर मां शेर की सवारी घोड़े की सवारी की तरह से कर रही है। ऐसा माना जाता है कि मां का ऐसा विग्रह शायद कलायत शक्ति पीठ में ही है। इसके अलावा मंदिर में मां दुर्गा, मां सरस्वती व काली की पाषाणकालीन दुर्लभ मूर्तियां भी स्थापित हैं। पीठ में स्थित मां के विग्रह के अलावा मां का मंदिर भी अद्वितीय है। दक्षिणोमुखी इस मंदिर में आठ कोण हैं जो हर देवी को समर्पित हैं।