सीवन। नगर पालिका सीवन का चुनाव आगामी दो मार्च को होगा। इसमें कई प्रत्याशी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इसके लिए नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। नामांकन के लिए लोग कागजात तैयार कर रहे थे, लेकिन इसी बीच प्रत्याशियों को झटका लगा जब नगरपालिका से नो ड्यूज लेने के लिए उन्हें भारी भरकम विकास शुल्क चुकाने के निर्देश जारी कर दिए गए। ऐसे में सीवन नगर पालिका चुनाव में भारी विकास शुल्क ने नामांकन की रफ्तार रोक दी है।
चुनाव से पहले ही नगर पालिका की ओर से लगाए गए भारी-भरकम प्रॉपर्टी टैक्स ने जनता के बीच असंतोष फैला दिया है। यह कर न केवल आम नागरिकों के लिए, बल्कि चुनाव लडऩे के इच्छुक लोगों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। प्रॉपर्टी टैक्स व विकास कर जनता पर अतिरिक्त बोझ नगर पालिका बनने के बाद लोगों को विकास कार्यों की उम्मीद थी।
इसकी बजाय भारी करों की भारी मार लोगों पर मार पड़ रही है। मध्यम वर्ग और गरीब तबका पहले से ही महंगाई की चपेट में है और अब प्रॉपर्टी टैक्स ने उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया है। कई नागरिकों का मानना है कि इस टैक्स का बोझ इतना ज्यादा है कि यह चुनाव लडऩे वाले संभावित प्रत्याशियों को भी पीछे हटने पर मजबूर कर रहा है।
चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव इस बार पहली बार सीवन में नगरपालिका के चुनाव होने हैं। नामांकन करने के लिए नगरपालिका से नो ड्यूज लेना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए केवल प्रापर्टी टैक्स ही नहीं चुकाना। इसके साथ ही विकास शुल्क भी चुकाना आवश्यक किया गया है। इस कारण से कई लोगों ने भारी भरकम विकास शुल्क होने के कारण अपना नामांकन नहीं भरा।
उनका कहना है कि जब नगर पालिका ने कोई ठोस विकास कार्य नहीं किए, तो विकास कर के नाम पर इतनी रकम क्यों एंठी जा रही है। नगरवासियों को यह महसूस हो रहा है कि इस चुनाव के माध्यम से सिर्फ कर वसूली का एक नया तरीका अपनाया गया है, जिससे स्थानीय लोगों को कोई विशेष लाभ नहीं हो रहा। विकास कार्यों की धीमी गति सीवन नगर पालिका बनने के बाद से नगर में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।
सड़कें अभी भी जर्जर हालत में हैं, सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है और मूलभूत सुविधाओं का विकास बहुत धीमी गति से हो रहा है। ऐसे में जनता सवाल उठा रही है कि आखिर टैक्स की इतनी बड़ी रकम जा कहां रही है।
सीवन की जनता अब यह मांग उठाने लगी है कि नगर पालिका को भंग किया जाए। उनका कहना है कि जब तक सीवन गांव था और ग्राम पंचायत का गठन होता था उस समय भी विकास तो हो रहा था, परंतु कोई विकास कर के नाम पर अतिरिक्त रकम नहीं मांगी जा रही थी। यह तो नगरपालिका के गठन के साथ ही सभी लोग अपने ही बनाए मकानों और दुकानों में किरायेदार बना दिए गए हैं।
लोगों का कहना है कि जब तक उचित विकास कार्य नहीं होते और पारदर्शिता नहीं आती, तब तक करों की यह जबरन वसूली अनुचित है। आने वाले समय में अगर यह स्थिति नहीं बदली, तो जनता को मजबूरन नगर पालिका के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा। भर रहा है नगरपालिका का खजाना चुनाव में प्रापर्टी टैक्स और विकास शुल्क को अनिवार्य किया गया है और इससे भावी प्रत्याशी पहले अपनी जेब हल्की कर नगरपालिका का खजाना भरने में लगे हैं।
शुक्रवार तक नगरपालिका के पास चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने 10 लाख रुपये से अधिक राशि जमा करवा दी थी। अभी तो केवल चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार ही इस समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन निकट भविष्य में हर नागरिक को इस आर्थिक बोझ से गुजरना पड़ेगा। यदि प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो यह जनता और नगर पालिका के बीच टकराव का एक बड़ा कारण बन सकता है।
सीवन नगर पालिका चुनाव के दौरान विकास के नाम पर वसूला जा रहा कर सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। जनता को विकास से ज्यादा करों की चिंता सता रही है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और पारदर्शिता नहीं बरती, तो आने वाले दिनों में नगर पालिका के खिलाफ विरोध तेज हो सकता है। नियमानुसार हो रहा है कार्य नगरपालिका सचिव दीपक कुमार ने बताया कि सरकार की ओर से जो नियम निर्धारित किए गए हैं उसी के अनुसार ही नामांकन किया जा सकता है। कर की जो दर है वह भी सरकार की ओर से ही तय की गई है। जो भी प्रत्याशी चुनाव में नामांकन करना चाहते हैं उन्हें नियमों को पूरा करना ही होगा।