राजिंद्र तंवर
कैथल। जिले के खिलाडि़यों ने वर्ष 2024 में खेल सुविधाओं की कमी के बावजूद अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। हालांकि उनका कहना है कि जिले में खेल के बुनियादी ढांचे की स्थिति चिंताजनक है। इस पर और ध्यान दिए जाने की जरूरत है। ऐसा हुआ तो म्हारे खिलाड़ी खेलों में और बेहतरीन प्रदशन कर सकते हैं।
गौरतलब है कि खेल स्टेडियमों में सुविधाओं की कमी के बावजूद कैथल के सैकड़ों खिलाडि़यों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते है। रोज पेश आने वाली चुनौतियों के बावजूद म्हारे खिलाडि़यों ने तीरंदाजी, निशानेबाजी, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, क्रिकेट, जूडो, कुराश, हॉकी, फुटबाॅल, वुशू, हैंडबाॅल, बॉस्केट बॉल, ताइक्वांडो व पैरा खेलों में नाम रोशन किया।
नतीजा, अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय व राज्य स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में उन्होंने अपनी चमक बिखेरी है। विश्व स्तरीय मंच पर भी अपनी पहचान बनाई। यह उनकी अदम्य इच्छाशक्ति और खेल के प्रति जुनून का प्रमाण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
जिले के खिलाडि़यों को बेहतर खेल मैदान, खेल उपकरण व प्रशिक्षकों की कमी खलती रही है। सरकार ने इसी वर्ष जून में पूरे हरियाणा प्रदेश को 976 खेल नर्सरियां आंवटित की थीं। इसमें सरकारी व निजी खेल नर्सरियां शामिल हैं। वहीं कैथल जिले को 32 खेल नर्सरियां मिली थीं। अब जिले में सरकारी व निजी 54 खेल नर्सरियां शामिल हैं। इन नर्सरियों के सैकड़ों खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक जीते हैं।
इसके अलावा जिले में कुल 24 सरकारी कोच जिले में सेवाएं दे रहें हैं। इसके विपरीत स्याह पक्ष यह है कि विभिन्न खेलों के 12 प्रशिक्षकों की जिले में कमी है। वहीं 10 अक्तूबर 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार चीका में कई एकड़ बने रहे खेल स्टेडियम निर्माण कार्य अभी तक अधूरा पड़ा है। इसका निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री जन कल्याण योजना के तहत इसमें 400 मीटर का सिंथेटिक ट्रैक भी निर्माणाधीन है। खिलाडि़यों को दूर दराज के मैदानों मेंं अभ्यास करने जाना पड़ता है।
जिले में छह राजीव गांधी खेल स्टेडियम बदहाल अवस्था में हैं जिन्हें मरम्मत की दरकार है। इसके लिए बजट मंजूर कर लिया गया था, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। सौंगल गांव में मल्टीपर्पज जूडो का हॉल अधूरा पड़ा है। आंधली गांव के स्टेडियम के साथ पाई में कबड्डी अकादमी का निर्माण अधूरा पड़ा है।
इसी प्रकार खेल नर्सरियों के खिलाडि़यों को खुराक भत्ते का इंतजार रहता है। यह भी जानकारी मिली है कि कुछ वर्ष से अनुसूचित जाति के खिलाडि़यों को छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिली।
उल्लेखनीय है कि कैथल के गुरु गोबिंद सिंह खेल स्टेडियम पट्टी अफगान का अगस्त मेंं सांसद नीवन जिंदल ने दौरा किया था। खेल प्रेमी खिलाडि़यों ने जिंदल से उम्मीद जताई है कि जिस प्रकार बंगलुरू के बिलारी में जेएसडब्ल्यू खेल अकादमी में खिलाड़ियों को बेहतरीन सुविधाएं देकर तैयार किया जाता है। ठीक इसी तर्ज से इस खेल स्टेडियम को भी गोद लेकर उसी तर्ज पर यहां भी खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं प्रदान की जाएं। संवाद
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पेरिस पैरालंपिक 2024 सितंबर में कैथल के अजीतनगर गांव निवासी हरविंद्र सिंह ने पेरिस पैरालिंपिक तीरंदाजी स्पर्धा के मैन ओपन रिकर्व इवेंट में स्वर्ण जीतकर नया इतिहास रच दिया। वहीं हरिवंद्र सिंह ने इससे पहले भी टोक्यो पैरालिंपिक में देश को कांस्य पदक दिलवाया और देश को दो पदक दिलवाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।
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जिले के भैनी माजरा गांव की बेटी स्मृति चहल ने उज्बेकिस्तान में दिसंबर को हुई कुराश प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए ईरान को पराजित कर कांस्य पदक जीता और एक हजार डॉलर का कैश अवार्ड भी प्राप्त किया। साथ ही विश्व तालिका में तीसरा स्थान पाया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार और गांव का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे देश को गर्व महसूस कराया।
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जिले की ताइक्वांडो खिलाड़ी भतेरी ने अपने खेल कॅरिअर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और राज्यस्तर प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कई पदक जीते हैं। नवंबर में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी महिला ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भतेरी ने स्वर्ण पदक जीता था। भतेरी की इस सफलता ने न केवल उनके परिवार और जिले का नाम रोशन किया है, बल्कि देश को भी गौरवान्वित किया है।
n कुलतारण गांव की बेटी पायल ने इसी वर्ष अगस्त, सितंबर में दुबई के अबूधाबी में हुई विश्व जूनियर मुक्केबाजी प्रतियोगिता में फाइनल मुकाबले में कजाकिस्तान की खिलाड़ी एयम तनकी बायेवा को विजेता मुक्का मार कर पंाच शून्य से पराजित किया व स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम गौरवान्वित किया। पायल ने इससे पूर्व विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर कई पदक जीते हैं।
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जिले की दो बहनें जीवन विजेता व सवेरा ने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय व राज्यस्तर पर वुशू में अपने करियर में कई पदक जीते हैं, जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कईं स्वर्ण, रजत, और कांस्य पदक शामिल हैं। उनकी उपलब्धियों ने न केवल जिले का, बल्कि देश का गौरव बढ़ाया है।
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जिले के राष्ट्रीय निशानेबाज खिलाड़ी हिमांशु ने हाल ही में दिसंबर में भोपाल हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में चार स्वर्ण व एक कांस्य पदक जीते। 67वीं स्कूली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो राष्ट्रीय रिकार्ड बनाए जिसका टॉप स्कोर 632.5 रहा। भारत में नं एक तालिका में स्थान पा कर देश का मान बढ़ाया है।
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जिले के दो खिलाड़ी गुलाब व निकेत ने भिवानी में दिसंबर में हुई स्कूली राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता में जोरदार प्रदर्शन कर हरियाणा की टीम को स्वर्ण पदक दिलाया व प्रथम ट्रॉफी पर भी कब्जा किया।
खेल विभाग सभी नर्सरियों के खिलाडि़यों को समय समय पर बेहतर सुविधाएं प्रदान करने में प्रयासरत है। इसके अलावा समय-समय पर खेल के सामान की डिमांड भेजी जा रही है। ओर वे समय पर सभी खेल नर्सरियों का दौरा कर, खिलाडि़यों से मिलकर उनकी समस्या जानती है। ताकी किसी भी खिलाड़ी को कोई परेशानी न रहे।- राजरानी, जिला खेल अधिकारी।