जिले भर में रविवार को दीपावली पर्व धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने रात के समय जमकर आतिशबाजी की। वहीं दिन में बाजार भी भीड़ से गुलजार रहे। लोगों ने जमकर खरीददारी की।
कलायत में रस्मों व रिवाजों के साथ कलायत में दीपावली उत्सव धूमधाम से मनाया गया। दीपावली के दिन बाजारों में खूब रौनक रही तथा भारी महंगाई के बावजूद लोगों ने जम कर खरीददारी की। दो दिन पूर्व तक बाजारों में चहल पहल कम थी पर धनतेरस को गुलजार हुए बाजार में ग्राहकी लगातार बढ़ती ही रही। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार मिठाई की दुकानों पर ग्राहकी कम रही। लोगों ने इस बार भेंट करने में देसी मिठाई, ड्राईफ्रूट व बिस्कुट के गिफ्ट हैंपरों को अधिमान दिया। देसी मिठाई में पिन्नी, बूरा व सूत के लड्डू खोए की मिठाईयों पर हावी रहे। खरीददारों ने बाजार में मिठाई की दुकानों पर सजी गहरे रंग की मिठाईयों से परहेज ही किया। लोगों ने दीवाली के अवसर पर अपने अपने घरों को रौशनी से पूरी तरह से सजाया था। चायनीज लडिय़ों व दीपों की बजाए इस बार माटी के बने दिये घरों में खूब रौशन हुए। इलैक्ट्रोनिक्स व बर्तनों की दुकानों पर भी लोगों ने जम कर खरीददारी की।
राजेश कुमार का कहना था कि हालांकि बाजार में उपलब्ध कोई भी वस्तु आम आदमी की खरीद से बाहर है उसके बावजूद भी दीपावली के अवसर पर खरीददारी करने में कोई कमी नही है। सांयकाल में छह बजे से महालक्ष्मी की पूजा का काल आरंभ हो गया जिसमें लोगों ने साढ़े नौ बजे तक पूजा की। पूजा के उपरांत लोगों ने आतिश बाजी का आनंद लिया तथा उपहारों का आदान प्रदान किया।
इसी प्रकार से सोमवार को कलायत में अन्नकूट व गोवर्धन पर्व को पारंपरिक ढंग के साथ धूमधाम से मनाया गया। कपिल मुनि मंदिर परिसर में स्थित राधाकृष्ण मंदिर में पूरा दिन श्रद्धालुओं की भीड़ रही व बाद दोपहर तक लोग मंदिर में बंटने वाले अन्नकूट का प्रसाद ग्रहण करते रहे। अपने अपने घरों में लोगों ने पारंपरिक ढंग से गाय के गोबर से भगवान गोवर्धन को बना कर दिन भर उसकी पूजा की तथा सांय में बछड़े को बनाए गए गोवर्धन के उपर से निकाल कर उसका विसर्जन किया। पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि आज का पर्व भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। उन्होंने बताया कि आज के दिन छोटे से सात वर्ष के बालकृष्ण ने ब्रज के लोगों को सात कोस के गिरिराज को सात दिन तक अपनी अंगुली पर उठा कर इंद्र के कोप से बचा कर इंद्र के घमंड का मर्दन किया था। उन्होंने कहा कि कालों से चली आ रही परंपराओं को यदि किसी कौम ने जीवित रखा है तो वह है हिंदु संस्कृति।