संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की 280 टीमें लगातार फील्ड में सक्रिय हैं, लेकिन इसके बावजूद लारवा मिलने के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विभागीय जांच में रोजाना औसतन 10 घरों में डेंगू का लारवा पाया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ा है। एक महीने के औसत में प्रतिदिन करीब 30 घरों में लारवा मिलने के मामले सामने आ रहे हैं। विभाग ने इन सभी घरों में लारवा नष्ट करने की कार्रवाई की है और संबंधित परिवारों को नोटिस भी जारी किए हैं। चेतावनी दी गई है कि दोबारा लारवा मिलने पर जुर्माना लगाया जाएगा।
एक अप्रैल से चल रहे अभियान के तहत अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें 5 लाख 26 हजार से अधिक घरों की जांच कर चुकी हैं। इनमें कुल 855 घरों में डेंगू का लारवा पाया गया है। इसके अलावा 597 संदिग्ध लोगों के डेंगू जांच सैंपल लिए गए, जो सभी निगेटिव पाए गए हैं।
1 जुलाई से 934 आशा वर्कर भी होंगी शामिल
स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की रोकथाम को और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक जुलाई से जिले की 934 आशा वर्करों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा। ये आशा वर्कर घर-घर जाकर लारवा की जांच करेंगी और लोगों को डेंगू से बचाव के प्रति जागरूक करेंगी।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पिछले वर्ष जिले में डेंगू के 92 और मलेरिया के कई मामले सामने आए थे, जिसे देखते हुए इस बार पहले से अधिक सख्ती और निगरानी रखी जा रही है।
वर्जन
डेंगू की रोकधाम के लिए पहले ही विभाग की टीमें धरातल पर काम कर रही हैं। एक जुलाई से आशा वर्कर भी लारवा की जांच और जागरूक करने का काम शुरू करेंगी। विभाग के प्रयास हैं कि पूरे जिले में डेंगू व मलेरिया न फैले और इसको लेकर पूरी तैयारी विभाग की ओर से की गई है। -डॉ. नीरज मंगला, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।