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Kaithal News: सीवन वासियों की मांग, लौटा दो पंचायती राज

Tue, 09 Jul 2024 06:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सीवन। वर्ष 2019 में भाजपा की जनसंदेश यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सीवन को नगरपालिका बनाने की घोषणा की थी। करीब दो वर्ष बाद भाजपा जजपा गठबंधन सरकार में सीवन को नगरपालिका का दर्जा मिल गया था। इससे सीवन के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब सीवन को नगरपालिका बनाने से विकास के पंख लगेंगे, लेकिन उनका आरोप है कि तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी सीवन पहले से भी पिछड़ गया है। सीवन वासियों ने मांग की हमें हमारा पंचायती राज लौटा दो।

नगरपालिका बनने से पहले पंचायती राज में सीवन ग्राम पंचायत होते हुए अभूतपूर्व विकास कार्य हुए। ग्राम पंचायत की ओर से गांव को सबसे स्वच्छ गांव बनाना, पानी निकासी के लिए सीवर लाइन, घर-घर जल कनेक्शन दिलाने, चौपालों का नवीनीकरण, पुस्तकालय व ग्राम सचिवालय की व्यवस्था, खेल मैदान को विकसित करना, श्मशान घाट की व्यवस्था, गलियों व खेतों के रास्ते पक्के करना धरातल पर पंचायत की ओर से कार्य किए जाते थे, लेकिन अब नगरपालिका का दर्जा मिलने से विकास की रफ्तार थम गई है और सीवन पिछड़ने लगा है।
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नगर नववासी बलदेव सिंह बल्ली, राहुल कथूरिया, जीवन मेहरा, गगन, भीषू चौधरी, पाला, सुरेश, सुरेंद्र नागपाल, दर्शन, संजय, नरेश सहित अधिकतर ने कहा कि गांव के लोगों की मांग पर पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इसे नगर पालिका बनाया। ग्रामीणों को उस समय नहीं मालूम था कि नगरपालिका बनने पर उनके सामने क्या परेशानी आने वाली हैं। नगरपालिका बनने से अब ग्रामीण परेशान हो गए हैं, क्योंकि अनेक प्रकार पर ग्रामीणों पर टैक्स लगने लगे है। कोई व्यक्ति मकान बनाना चाहता है, तो उसे पहले इसका नक्शा पास करवाना पड़ता है। इस तरह के दिन प्रतिदिन लागू होते नगरपालिका के नियमों से लोग परेशान हो चुके है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नगरपालिका भंग करके पंचायती राज लागू नहीं होता तब तक यह परेशानी रहेगी। ग्रामीण शहरीकरण को खत्म कर दोबारा से सीवन में पंचायती राज व्यवस्था लाने की सरकार से मांग कर रहे है।

बोले-अपने ही घर में हो गए किरायेदार

नगर निवासियों का कहना है कि गांवों में सभी लोगों ने अपने अपने मकान बनाए हैं। लेकिन अब नगरपालिका की ओर से उन्हें टैक्स के नोटिस आ गए हैं जोकि बाहर के क्षेत्र में तो बहुत अधिक हैं। अब लोगों को लग रहा है कि जिस प्रकार से उन्हें अब टैक्स देना पड़ेगा तो उससे लगता है कि वह अपने ही घरों में किरायेदार हो गए हैं और उन्हें किराया अदा करना पड़ेगा। उन पर डेवलेपमेंट चार्ज लगाया गया है। इससे लगता है कि उन्हें अपना ही मकान सरकार से दोबारा खरीदना पड़ रहा है।

सीवन नगरपालिका की घोषणा मेरे कार्यकाल में हुई थी। अब यदि सीवन कर जनता चाहती है कि सीवन का नगरपालिका का दर्जा समाप्त किया जाए और दोबारा से पंचायती राज को लाया जाए तो उसके लिए भी वह सरकार से बात करने को तैयार हैं। इसके लिए पूर्ण प्रयास किया जाएगा। इसके लिए वह सीवन की जनता के साथ हैं। -कुलवंत बाजीगर, पूर्व विधायक

ग्रामीण क्षेत्र होने से विद्यार्थियों को मिलता था पांच प्रतिशत का लाभ
पहले गांव के बच्चों को ग्रामीण क्षेत्र में होने की वजह से एडमिशन और नौकरियों में पांच प्रतिशत का फायदा मिलता था। अब वह भी बंद हो गया है। सीवन की 65 प्रतिशत आबादी गरीब वर्ग से आती है। जो खेती या खेती संबंधित व्यवसाय पर निर्भर है। नगरपालिका आने से मनरेगा में मजदूरी करने वाले मजदूरों का रोजगार छीन गया है। गांव के करीब 4500 मनरेगा मजदूर नगरपालिका बनने से बेरोजगार हो गए है।
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सीवनवासियों ने कहा कि ग्राम पंचायत होने के समय मूलभूत समस्या को लेकर पंच, सरपंच से किसी भी समय मिलकर समस्या का समाधान करवा लेते थे। सरपंच बिना देरी किए समस्या का निपटान कर देता था। लेकिन जब से नगरपालिका बनी हुई है तब से समस्या बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों को कोई समस्या होती है तो नगरपालिका में उसे दुरुस्त करवाने के लिए जाते है तो वहां पर केवल नगरपालिका कर्मचारी ही मिलते हैं अधिकारी कभी मौके पर नहीं मिलते हैं। कर्मचारियों का कहना होता है कि जब अधिकारी मौके पर आएंगे तो ही काम होगा। जिस कारण समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है।
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