हरियाणा के यमुनानगर में पीएम मोदी से जूते पहनने वाले कैथल के गांव खेड़ी गुलाम अली निवासी रामपाल कश्यप प्रधानमंत्री से मिलकर अपने आप को खुशनसीब बता रहे हैं। कश्यप मंगलवार को कैथल में अपने गांव में पहुंचे। इस दौरान रामपाल कश्यप ने जूते न पहनने के संकल्प लेने के कारण बताए।
रामपाल कश्यप ने बताया कि वर्ष 2012 में अपने गांव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के झंडे लगा रहे थे। तब एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने उन पर कटाक्ष किया। उसने ताना दिया कि वह क्यों बेवजह भाजपा के झंडा लगा रहा है, इसका कुछ नहीं होने वाला। यह उन्हें अच्छा नहीं लगा और उनकी बहस हो गई।
इसके बाद रामपाल कश्यप ने संकल्प लिया कि जब तक केंद्र और राज्य में भारतीय जनता पार्टी की बहुमत वाली सरकार नहीं आती, तब तक वह नंगे पैर रहेंगे और जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे।
बता दें कि प्रधानमंत्री की ओर से जूते पहनाने के बाद
रामपाल कश्यप को काफी चर्चाओं में आ गए हैं। इसके बाद वे सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनके गांव खेड़ी गुलाम अली में लड़कियों के लिए कॉलेज खोला जाए। युवाओं के लिए स्टेडियम और एक सरकारी अस्पताल भी बनाया जाए।
मोदी के पीएम बनने पर पार्टी कार्यकर्ता ने दी थी जूते पहनने की सलाह
वर्ष 2014 में भाजपा की सरकार बनी और नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बन गए। तब भाजपा कार्यकर्ताओं ने रामपाल से कहा कि जूते पहन लो, अब तो आपका संकल्प पूरा हो गया। तभी उन्होंने कहा कि जब तक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे नहीं मिलेंगे कब तक वह जूते नहीं पहनेंगे।
रामपाल के लिए मंगवाए थे दो जोड़ी जूते
राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा के भेजे वीडियो के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य अशोक गुर्जर के पास एक फोन आया और रामपाल कश्यप की पूरी जानकारी मांगी। अशोक गुर्जर ने फोन के माध्यम से उनसे संपर्क किया और फिर इसे मिलकर बात की। उनसे जूते का नंबर पूछा।
संशय रहने पर दो जोड़ी जूते मंगवाए गए। एक छह नंबर और दूसरा सात नंबर का। लगभग 14 साल तक नंगे पांव रहने पर रामपाल के जूते का एक नंबर बढ़ चुका था। उन्हें सात नंबर का जूता आया।