संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की लगातार बढ़ती कीमतों ने शहर के होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बढ़ते खर्च से बचने के लिए अब कई प्रतिष्ठान संचालकों ने पारंपरिक वाणिज्यिक सिलिंडर से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका असर बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। कमर्शियल सिलिंडर की मांग में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पाइप नेचुरल गैस (पीएनजी) के लिए आने वाले आवेदनों में चार गुना तक बढ़ोतरी हो गई है।
पहले जहां प्रतिमाह करीब 300 पीएनजी आवेदन आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 1200 से अधिक पहुंच गई है। वर्तमान में एक वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमत लगभग 3,125 रुपये तक पहुंच चुकी है। कारोबारियों का कहना है कि ईंधन की लागत इतनी बढ़ गई है कि मुनाफे का बड़ा हिस्सा गैस के खर्च में ही निकल जाता है। खासकर छोटे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट संचालकों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
गैस एजेंसी संचालक चंद्रमोहन ने बताया कि वाणिज्यिक सिलिंडर की मांग में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी आई है। उनका कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण अधिकतर कारोबारी अब वैकल्पिक ईंधन की तलाश कर रहे हैं।
पीएनजी बना कारोबारियों की पहली पसंद
वाणिज्यिक सिलिंडर के झंझट और महंगे खर्च से बचने के लिए अब पीएनजी सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरी है। कारोबारी न केवल खर्च कम करने के लिए, बल्कि इसकी सुरक्षित और लगातार मिलने वाली आपूर्ति को देखते हुए भी पीएनजी कनेक्शन ले रहे हैं।
मांग में अचानक आई तेजी के कारण गैस कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। हालात यह हैं कि अब पीएनजी कनेक्शन लगवाने के लिए उपभोक्ताओं को कम से कम एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ रहा है।
पीएनजी मैनेजर नीरज ने बताया कि बढ़ते आवेदनों को देखते हुए कंपनी की इंजीनियर और कर्मचारी टीमें लगातार काम कर रही हैं, ताकि लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा किया जा सके।
डीजल भट्ठी का उपयोग भी बढ़ा
पीएनजी के अलावा कई बड़े हलवाई और ढाबा संचालक अब फिर से डीजल भट्ठी की ओर लौट रहे हैं। उनका मानना है कि बड़े स्तर पर खाना पकाने के लिए डीजल भट्ठी वाणिज्यिक सिलिंडर की तुलना में काफी सस्ती पड़ती है।
हालांकि पर्यावरण के लिहाज से डीजल भट्ठी को बेहतर विकल्प नहीं माना जाता, लेकिन कारोबारी बढ़ते आर्थिक बोझ को इसकी मुख्य वजह बता रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली, तो बाजार में सिलिंडर का उपयोग और कम हो सकता है।