अस्पताल पहुंच कर भी अंदर जाने का रास्ता न मिलने के कारण एक महिला ने गाड़ी में ही बेटे को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ बताए गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों की तत्परता से तुरंत पुलिया बनवाकर दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया। परिजनों ने सड़क बना रही एजेंसी द्वारा अस्पताल के सामने के रास्ते को बंद किए जाने पर रोष प्रकट किया।
गांव कैलरम की निवासी कृष्णा ने बताया कि उनकी पुत्र वधू सुमन को प्रसव पीड़ा होने पर वे उसे लेकर बात्ता के पीएचसी में आये। गांव कैलरम से बात्ता गांव मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर है। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क के दोनों और बनाए गए नालों पर पुलिया न होने के कारण उनकी गाड़ी अस्पताल में पहुंच ही नहीं सकी। बच्चे का जन्म गाड़ी में ही हो गया। अस्पताल में तैनात नर्स शीला ने बच्चे के जन्म के बाद की प्रक्रिया गाड़ी में ही पूरी की। अस्पताल वालों ने सड़क बना रहे लोगों को सारी जानकारी दी तो उन्होंने तुरंत जेसीबी लगा कर नाले पर अस्थाई पुलिया बनाई जिसके बाद गाड़ी अस्पताल में प्रवेश कर सकी।
अस्पताल में तैनात नर्सों ने नव प्रसूता व उसके बच्चे को ओटी में ले जाकर बाकी का कार्य किया। नवजात के पिता मुनीम सिंह ने बताया कि अस्पताल के कर्मचारी यदि तत्परता दिखाते हुए उनकी गाड़ी में ही ओड नाल न काटते तो बच्चे व माता को खतरा हो सकता था। दादी कृष्णा देवी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रहे नालों पर अस्पताल के सामने तो पुलिया सबसे पहले बनाई जानी चाहिए थी। किसी भी समय कोई इमरजेंसी का मरीज अस्पताल आ सकता है। निर्माण ऐजेंसी पर गुस्सा निकालते हुए उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन सड़क पर अस्पताल, स्कूल के सामने तो प्रवेश का मार्ग किसी भी सूरत में बंद करना अनैतिक है। उन्होंने इस मामले में प्रशासन से मांग की कि निर्माण एजेंसी को आदेश जारी किये जाएं कि प्राथमिकता के आधार पर पुलिया बनवाएं।