कैथल। यदि आप पंजाबी भाषा में कोई शिकायत पत्र लेकर डीसी कार्यालय में जाते हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि डीसी साहब को पंजाबी नहीं आती और वे इससे आगे एक शब्द नहीं सुनते। कुछ ऐसा ही नजारा शुक्रवार को डीसी कार्यालय में देखने को मिला। जब डीसी के रूखे व्यवहार को देखकर लोग अवाक रह गए। आम आदमी के साथ-साथ डीसी ने मीडिया कर्मी को यहां तक कह दिया कि आप मेरे घर में घुसोगे क्या? आपको शर्म आनी चाहिए।
दरअसल शुक्रवार दोपहर लंबे इंतजार के बाद डीसी निखिल गजराज से मिलने के लिए फरियादियों की भीड़ उनके कार्यालय में पहुंची। डीसी ने दर्जन भर फरियादियों को महज पांच मिनट में आधी अधूरी बात सुनकर चलता कर दिया। इन्हीं फरियादियों में एक निहंग की वेशभूषा में सरदार जी डीसी के सामने पहुंचे। उन्होंने पूरी तरह से सजाया हुआ दस्तार भी डाला हुआ था। डीसी को जैसे ही अपनी शिकायत थमाई तो डीसी ने वापस देते हुए कहा मुझे पंजाबी नहीं आती ...लेकर जाइए इन्हें पीए के पास।
इस बात को सुनकर सुरक्षाकर्मी सरदार जी को बाहर लेकर चले गए। जहां डीसी के पीए ने भी गुहला एसडीएम से बात करने की बात कहकर उन्हें भेज दिया। इस तरह से 51 किलोमीटर दूर से अपनी फरियाद लेकर आए बुजुर्ग को निराश होकर लौटना पड़ा। बाद में पता चला कि सरदार जी गुहला खंड के पंजाब बार्डर पर स्थित घग्गड़पुर गांव से संबंधित कोई शिकायत लेकर आए थे।
मीडियाकर्मी को कहा, आप बाहर जाइए।
इतना ही नहीं डीसी से मीडिया कर्मी द्वारा उनकी घोषित संपत्ति की जानकारी पूछे जाने पर भड़क उठे और कहा कि शर्म आनी चाहिए आपको। मेरे घर तक घुसोगे क्या? हालांकि मीडियाकर्मी से बाद में एक अधिकारी के सामने अपनी गलती का एहसास करते हुए खेद भी जता लिया। यहां सवाल उठता है कि मीडियाकर्मी से तो खेद प्रकट कर लिया।
लेकिन उन लोगों पर क्या बीतती होगी, जो यहां शिकायत लेकर पहुंचते हैं और उन्हें आगे डीसी स्तर के अधिकारी से ठीक से जवाब भी नहीं मिलता। समस्याओं के समाधान की बात तो दूर है। जबकि सरकार के आदेश हैं कि कार्यालयों में फरियाद लेकर आए लोगों से ठीक से व्यवहार किया जाए।
पूरे वाकये में प्रत्यक्षदर्शी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने डीसी के इस व्यवहार की कड़ी निंदा की। दिनेश रहेजा व श्याम लाल हजवाना ने कहा कि वे हैरान थे। डीसी इस तरह से व्यवहार कैसे कर सकते हैं।
डीसी जिले का सर्वोच्च पद होता है। जहां लोग न्याय की उम्मीद लेकर जाते हैं। और जिस तरह से डीसी लोगों से व्यवहार कर रहे थे, वह असंवेदनशील रवैया है। इस बारे में सरकार में सक्षम लोगों से बात की जाएगी। डीसी पंजाबी नहीं जानते लेकिन कोई बात नहीं लेकिन सुन तो सकते हैं।