माई सिटी रिपोर्टर
कैथल। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना के राष्ट्रीय वैक्सीनेशन कार्यक्रम के क्रियान्वयन में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। एक महिला को कोवाक्सीन लगाकर उसे कोविशिल्ड का प्रमाण पत्र दे दिया गया। अमर उजाला की ओर से मामले का खुलासा किए जाने पर डीसी सुजान सिंह यादव ने संज्ञान लिया है और मामले की जांच जिले में कोरोना महामारी में नियुक्त एचसीएस सत्येंद्र सिवाच को तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि एक महिला ने बताया है कि 14 मई को गांव कांगथली में बनाए गए कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर में उसे व उसकी मां को इंजेक्शन लगाया गया था। उसकी मां का तो प्रमाणपत्र ऑनलाइन अपलोड हो गया। उसका प्रमाण पत्र अपलोड नहीं हुआ। जब उसने विभाग में संपर्क किया तो उसे कोविशिल्ड इंजेक्शन का ऑफलाइन प्रमाण पत्र दे दिया गया, जबकि उसे कोवाक्सीन लगाई गई थी। इसके अलावा उसे जो प्रमाण पत्र दिया गया, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर उसके मोबाइल से करवाए गए रजिस्ट्रेशन नंबर से भी नहीं मिल रहा है। यह अलग नंबर है। जिस कारण उसका ऑनलाइन प्रमाण पत्र अपलोड नहीं हो पाया है।
अमर उजाला ने यह मामला प्रमुखता से उठाया। डीसी सुजान सिंह यादव ने बताया कि यह गंभीर बात सामने आई है। पता लगाया जा रहा है कि क्या सच्चाई है। मामले की जांच के लिए एचसीएस सत्येंद्र सिवाच को तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। वहीं सूत्रों ने बताया कि 14 मई को जिस सेंटर में महिला को दवा लगाई गई है, वहां पर सौ लोगों को ही दवा लगाने की अनुमति थी, लेकिन ऑफलाइन सैकड़ों लोगों को टीका लगा दिया गया। इस सवाल पर जिला अस्पताल में वैक्सीनेशन इंचार्ज डा. प्रदीप नागर ने कहा कि अभी मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद ही बताया जा सकेगा कि क्या मामला है।