संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हनुमान वाटिका स्थित शिव मंदिर में सावन माह के उपलक्ष्य में आयोजित शिव महापुराण कथा बुधवार को पांचवें दिन भी श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में महिलाओं और श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने सती चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि सती न केवल तपस्या और श्रद्धा की प्रतीक थीं, बल्कि आदर्श नारी के रूप में भी पूजनीय हैं। सती दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं, जिन्होंने माता-पिता की अनुमति से कठोर तप का आरंभ किया।
उन्होंने वर्ष के चारों ऋतुओं में शिव-पूजन, व्रत, उपवास और पुष्प अर्पण के माध्यम से भगवान शिव को प्रसन्न किया। अंततः ब्रह्मा और विष्णु के आग्रह पर, दक्ष ने नारद मुनि की सलाह से सती का विवाह शिव से करने का निर्णय लिया।
पंडित विशाल ने बताया कि विवाह के बाद राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने भगवान शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया। यह शिव के अपमान की भावना से प्रेरित था। सती जब यह अपमान सहन नहीं कर सकीं तो यज्ञस्थल पर पहुंचकर स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया। सती की मृत्यु से भगवान शिव अत्यंत शोक और क्रोध से भर गए। उन्होंने वीरभद्र और भद्रकाली को उत्पन्न किया, जिन्होंने यज्ञ स्थल को विध्वंस कर दक्ष का वध किया। इसके पश्चात भगवान विष्णु ने सती के मृत शरीर को 51 खंडों में विभाजित किया, जिन स्थानों पर उनके अंग गिरे, वहीं शक्तिपीठों की स्थापना हुई। ये शक्तिपीठ आज भी श्रद्धा और भक्ति के प्रमुख तीर्थस्थल हैं।
इस धार्मिक अवसर पर बोती, धन्नो देवी, योगेश, कमला, नरेश, बलवंत, रिंकू, लक्की, प्रवीन, सुरेश, रमेश, अनिल, धर्मेंद्र आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।