पिछले कई दिनों से चल रहे अनुदेशक संदीप कुमार को हटाने के प्रकरण के कारण संदीप कुमार मानसिक रूप से परेशान थे। यही कारण है कि उन्होंने शनिवार को ही सुबह हनुमान वाटिका में बैठकर दो पेज का सुसाइड नोट लिखा और संभवत: सुसाइड करने की जरूरत न हो। इसके लिए वे जवाब मांगने संस्थान में भी आए। लेकिन शनिवार को भी सुनवाई न होने पर उन्होंने जहरीला पदार्थ निगल लिया। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा है कि यदि उन पर बर्खास्त करने के लिए लगाए गए आरोपों में से एक भी साबित हो जाए तो भगवान उन्हें नरक में भी जगह न दे।
ये लिखा है सुसाइड नोट में
नमस्कार, प्यारे साथियों... मैं संदीप कुमार गांव नरवलगढ़ कैथल आपसे आज दिल की बात कहना चाहता हूं कि मैं जो भी कहूंगा परमात्मा को साक्षी मानकर कहूंगा और भगवान के सामने कहूंगा। क्योंकि मैं अभी हनुमान वाटिका में हनुमान जी की प्रतिमा के सामने बैठा हूं। साथियों बात यह है कि मैं जाट आईटीआई में अनुदेशक के रूप में 21 मई 2017 से कार्यरत हूं। मैंने अपना काम हमेशा ईमानदारी से किया है। मेरा रिजल्ट इसकी गवाही देगा। लेकिन जैसा आप जानते हैं कि आजकल जैसा चलन है। योग्यता पर चापलूसी और चुगली हावी होती जा रही है। मैं भी इसका शिकार हुआ हूं। मुझे परसों बिना कोई कारण बताए पद से बर्खास्त कर दिया गया। उस समय मैं संस्थान में मौजूद भी नहीं था। आधे दिन की छुट्टी लेकर चला गया था। उन्होंने एक बार भी मुझे बुलाकर मेरा पक्ष जानना तो दूर, मेरा अगले दिन संस्थान में आने का इंतजार भी नहीं किया और ई-मेल के जरिए मुझे मेरा बर्खास्तगी पत्र भेज दिया। जिससे मेरे मन को गहरा आघात लगा। उसके बाद मैंने अपनी बर्खास्तगी का कारण जानने की कोशिश की। मैं कल भी मैनेजमेंट ऑफिस के आगे पूरा दिन बैठा रहा। परंतु प्रधान जी व मैनेजमेंट सदस्यों ने मेरी बात सुननी तो दूर मेरी राम-राम का जवाब भी नहीं दिया। साथियों मैं बहुत ही हीन महसूस कर रहा हूं। अब और तिरस्कार सहने की हिम्मत नहीं है। मैनेजमेंट सदस्यों को बताना चाहता हूं कि मैं हमेशा एक ईमानदार सदस्य रहा हूं। आपको मेरे बारे में सत्यवान मलिक व सतबीर चहल जी ने गलत जानकारी देकर गुमराह किया है। यदि आप मेेरे मरने के बाद भी मेरे बर्खास्तगी पत्र में लगाया गया एक भी आरोप साबित कर पाएं तो परमात्मा मुझे नरक मेें भी जगह न दे। मैं हमेशा पढ़ने और पढ़ाने में सबसे आगे रहा हूं। जिस पद पर हूं, जिसमें आपने मुझ पर अयोग्य होने के आरोप लगाए हैं। पिछले साल मैंने एचएसससी द्वारा आयोजित परीक्षा में तीन परीक्षाएं दी थीं। जिसमें से दो का परिणाम आया है। मैं दोनों में पास हुआ हूं। तीसरे का परिणाम आना अभी बाकी है। जो सिविल ड्रॉफ्टसमैन का है। आप पिछले सारे रिजल्ट निकाल लें। मेरे द्वारा पढ़ाए गए बच्चों के परिणाम भी शानदार मिलेंगे। बस एक कमी है कि मुझ में चापलूसी और चुगली नहीं होती। मैंने कोरोना काल में बच्चों की मदद के लिए यूट्यूब चैनल बनाया। जिसका नाम नरवल नॉलेज एंपायर है। परंतु उसको भी यह कहकर बंद करवाने का प्रयास किया गया कि आप अपनी लोकप्रियता बढ़ा रहे हैं। जिसके बाद मैंने उस पर आईटीआई की क्लास लेना बंद कर दिया। मेरी मौत का जिम्मेदार भी सतबीर चहल, सत्यवान मलिक व सत्यवान की धर्मपत्नी को माना जाए। क्योंकि सत्यवान की धर्मपत्नी ने भी फोन करके मेरी बदनामी में अहम भूमिका निभाई है। वह मैनेजमेंट सदस्य, जिन्होंने मेरे बर्खास्तगी पत्र पर बिना मेरा पक्ष जाने हस्ताक्षर किए हैं। बाकी वे तो मुझ से कभी मिले भी नहीं। कुछ तो मुझे शक्ल से भी नहीं जानते। मैं बस अपने पिता और बेटे से माफी मांगना चाहता हूं कि मैं अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा पाया। लेकिन मैं मजबूर हैं। मैं तिरस्कृत हूं कि मैं आग में जल रहा हूं। मेरे बाद मेरे परिवार को परेशान न किया जाए। मैं बस इतना कहना चाहता हूं। मैं दोषी नहीं हूं। मेरा दाह संस्कार गांव में ही किया जाए। यदि मेरा कोई अंग किसी के काम आ सकता है तो दान कर दिया जाए। धन्यवाद
अलविदा दोस्तों
संदीप मलिक
अयोग्यता-नकारापन
बीटेक -73 प्रतिशत
पीजी अर्बन प्लानिंग एंड डेवेल्पमेंट