कैथल। हरियाणा में गेहूं का इस बार बंपर उत्पादन हो सकता है। जिसका बड़ा कारण सर्दी का गेहूं की फसल के लिए मुफीद रहा मौसम है। आने वाले समय में भी मौसम ने इसी प्रकार से साथ दिया तो सरकारी अनुमान से भी ज्यादा उत्पादन हो सकता है। कृषि विभाग की अपील है कि किसान 21-22 फरवरी को संभावित बारिश के बाद ही अपनी फसल में सिंचाई की योजना बनाएं और घने कोहरे की स्थिति में व बारिश कम होने पर हल्की सिंचाई करें।
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा में इस बार पिछले साल के मुकाबले 10 हजार हेक्टेयर में गेहूं की कम बीजाई हुई है। पिछले साल हरियाणा में अकेले गेहूं का रकबा 25.33 लाख हेक्टेयर था। जो इस बार घटकर 25.23 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछले सीजन में 46.87 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के औसत से हरियाणा में लगभग 11.87 लाख एमटी गेहूं का उत्पादन हुआ था। इस बार कृषि विभाग ने एरिया कम होने के कारण पिछले साल के मुकाबले अनुमान लगाया था कि इस बार गेहूं का उत्पादन 46.69 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के औसत से 11.78 लाख एमटी होगा। लेकिन अब अनुमान लगाया जा रहा है कि गेहूं का उत्पादन विभाग के अनुमान से अधिक होगा।
हरियाणा में कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. कर्मचंद ने कहा कि अभी तक मौसम गेहूं की फसल के लिए अनुकूल रहा है। पिछले कई सालों में देखा गया है कि फरवरी माह में ही अधिक गर्मी हो जाती थी। इस बार दिन का तापमान फरवरी माह में बढ़ा जरूर है। लेकिन गेहूं की फसल की दृष्टिगत अभी तक घने कोहरे ने इस तापमान से संभावित नुकसान की भरपाई कर दी है। इस समय गेहूं की फसल में 50 प्रतिशत में दूधा बन रहा है तो 50 प्रतिशत में बालियां बन रही हैं। जो फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण समय है। इस समय जितना अधिक कोहरा पड़ेगा, फसल के लिए उतना ही लाभदायक होगा। इसी कारण बंपर उत्पादन का अनुमान है। किसान 21 व 22 फरवरी की संभावित बारिश के हिसाब से अपनी फसल में हल्की सिंचाई की योजना बनाएं। अधिक बारिश नहीं होती है तो किसान फसल में जरूरत के हिसाब से हल्की सिंचाई करके रखें। ताकि दिन में अधिक तापमान व रात को घने कोहरे व ठंड के बीच फसल अपना संतुलन बनाकर रख सके।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा का कहना है कि इस समय जो कोहरा पड़ रहा है और अभी तक ठंड के मौसम का जो असर देखने को मिला है, उससे अनुमान है कि गेहूं की फसल में बंपर उत्पादन होगा।