संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। सोंगल गांव के ग्रामीणों ने पाई स्थित एक गैस एजेंसी के खिलाफ नाराजगी जताते हुए वितरण व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एजेंसी की गैस वितरण गाड़ी गांव के अंदर तक नहीं आती और बाहर ही सिलिंडर बांटकर वापस लौट जाती है, जिससे कई उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों के अनुसार गैस वितरण वाहन गांव की गलियों में प्रवेश नहीं करता। परिणामस्वरूप अनेक परिवारों को यह जानकारी ही नहीं मिल पाती कि सिलिंडर की गाड़ी कब आई और कब चली गई। इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और उन लोगों को अधिक दिक्कत होती है, जिनके पास स्वयं गांव के बाहर जाकर सिलिंडर लाने का कोई साधन नहीं है। ऐसे में बहुत समस्या होती है।
कई बार उपभोक्ताओं को खाली सिलिंडर उठाकर गांव के बाहर तक जाना पड़ता है, जो उनके लिए असुविधाजनक और समय लेने वाला कार्य साबित होता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस अव्यवस्था के कारण घरेलू कार्य प्रभावित होते हैं और रसोई गैस की नियमित आपूर्ति बाधित रहती है।
ग्रामीणों ने बताया कि वे इस समस्या के बारे में पहले भी कई बार एजेंसी संचालक को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। उनका आरोप है कि वितरण प्रक्रिया में नियमितता और पारदर्शिता की कमी है, जिसके कारण जरूरतमंद उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिल पाता। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाया जाए और एजेंसी को निर्देश दिए जाएं कि वितरण गाड़ी गांव के अंदर तक भेजी जाए, ताकि प्रत्येक उपभोक्ता को सुविधा पूर्वक और समय पर सिलिंडर उपलब्ध हो सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गैस सिलिंडर की इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने पर मजबूर होंगे।संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। सोंगल गांव के ग्रामीणों ने पाई स्थित एक गैस एजेंसी के खिलाफ नाराजगी जताते हुए वितरण व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एजेंसी की गैस वितरण गाड़ी गांव के अंदर तक नहीं आती और बाहर ही सिलिंडर बांटकर वापस लौट जाती है, जिससे कई उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों के अनुसार गैस वितरण वाहन गांव की गलियों में प्रवेश नहीं करता। परिणामस्वरूप अनेक परिवारों को यह जानकारी ही नहीं मिल पाती कि सिलिंडर की गाड़ी कब आई और कब चली गई। इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और उन लोगों को अधिक दिक्कत होती है, जिनके पास स्वयं गांव के बाहर जाकर सिलिंडर लाने का कोई साधन नहीं है। ऐसे में बहुत समस्या होती है।
कई बार उपभोक्ताओं को खाली सिलिंडर उठाकर गांव के बाहर तक जाना पड़ता है, जो उनके लिए असुविधाजनक और समय लेने वाला कार्य साबित होता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस अव्यवस्था के कारण घरेलू कार्य प्रभावित होते हैं और रसोई गैस की नियमित आपूर्ति बाधित रहती है।
ग्रामीणों ने बताया कि वे इस समस्या के बारे में पहले भी कई बार एजेंसी संचालक को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। उनका आरोप है कि वितरण प्रक्रिया में नियमितता और पारदर्शिता की कमी है, जिसके कारण जरूरतमंद उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिल पाता। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाया जाए और एजेंसी को निर्देश दिए जाएं कि वितरण गाड़ी गांव के अंदर तक भेजी जाए, ताकि प्रत्येक उपभोक्ता को सुविधा पूर्वक और समय पर सिलिंडर उपलब्ध हो सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गैस सिलिंडर की इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने पर मजबूर होंगे।