संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। साइबर ठग लगातार नए-नए हथकंडे अपनाकर आमजन को ठगी का शिकार बना रहे हैं। हाल के दिनों में साइबर अपराध का एक नया तरीका सामने आया है, जिसमें खुद को एनसीबी, सीबीआई, एनआईए जैसी इंवेस्टीगेशन एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी दी जा रही है और डर के माहौल में मोटी रकम ठगी जा रही है।
थाना साइबर क्राइम कैथल में प्राप्त साइबर फ्रॉड की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गत वर्ष 60 साइबर ठगों को काबू किया था। आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 33 हजार 620 रुपये नकद बरामद किए गए, जबकि 3 करोड़ 33 लाख 96 हजार 400 रुपये की राशि पीड़ितों को रिफंड करवाई गई।
इन आंकड़ों से साफ है कि साइबर ठग किस तरह आम लोगों की जीवनभर की जमा पूंजी को निशाना बना रहे हैं। हालांकि पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कई मामलों में ठगी की पूरी राशि की रिकवरी संभव नहीं हो पाती।
कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं : एसपी
एसपी उपासना ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई नियम या प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की ठगी में पीड़ित को न किसी से संपर्क करने दिया जाता है और न ही बाहर निकलने की अनुमति दी जाती है, जिससे डर के माहौल में उससे मोटी रकम वसूल ली जाती है।
अनजान नंबरों से आने वाले कॉल, व्हाट्सएप कॉल, वीडियो कॉल या टेलीग्राम कॉल न उठाएं। किसी के दबाव या डर में आकर खुद को कहीं बंद न करें और निजी जानकारी जैसे बैंक खाते, आधार, पैन आदि किसी के साथ साझा न करें। यदि किसी भी प्रकार का साइबर अपराध घटित होता है तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। -उपासना, एसपी
डिजिटल अरेस्ट को समझें
डिजिटल अरेस्ट वह स्थिति है, जब ठग फोन, वीडियो कॉल या ऑनलाइन धमकी देकर किसी व्यक्ति को डराते हैं और उसे घर से बाहर न निकलने, किसी से बात न करने या पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
पिछले कुछ समय से साइबर अपराधी कॉल या व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से आमजन से संपर्क कर रहे हैं। ठग खुद को किसी इंवेस्टीगेशन एजेंसी का अधिकारी बताते हुए डराते हैं और कहते हैं कि आपके पैन या आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक पार्सल भेजा गया है, जिसमें नारकोटिक्स (नशीली) सामग्री पाई गई है। इसके बाद जालसाज कभी एनसीबी, कभी सीबीआई, तो कभी एनआईए अधिकारी बनकर कॉल या व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते हैं।
ठग दावा करते हैं कि आपके नाम से एक संदिग्ध पार्सल पकड़ा गया है और आपको कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए कोर्ट फीस, जमानत राशि या केस से नाम हटाने के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। इसके बाद पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर घर के अंदर ही रहने, किसी कमरे में खुद को बंद करने और लगातार कैमरे के सामने रहने को कहा जाता है। यह भी चेतावनी दी जाती है कि यदि कमरे में कोई अन्य व्यक्ति आया तो दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इसी दौरान पीड़ित से बैंक खातों, निजी जानकारी और विभिन्न निवेश से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली जाती है। अंत में यह कहकर कि संभवतः आपको गलत तरीके से फंसा दिया गया है, जांच पूरी होने तक अपनी रकम आरबीआई या भारत सरकार के खाते में जमा करने को कहा जाता है, जिसे बाद में लौटाने का झांसा दिया जाता है।