एमटीपी किट बिक्री का गोरखधंधा स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयासों के बवाजूद खूब फल-फूल रहा है। कैथल से चल रहे एक बड़े गिरोह के गोरखधंधे के तार हरियाणा सहित पंजाब के कई शहरों में फैले हैं। स्वास्थ्य विभाग व पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा गिरफ्तार किए गए तीन युवकों से प्रारंभिक पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। तीनों को तीन दिन के रिमांड पर लेकर पुलिस ने अब गहनता से पूछताछ शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इस गिरोह का सबसे बड़ा सरगना भी कैथल से ही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को कैथल में गांव कांगथली से मिले सूत्रों की तार जोड़ते हुए तीन युवकों धीरज को 5 एमटीपी किट, उसे किट देने वाले राजेंद्र कुमार के अलावा अनिल कुमार को 10 हजार 600 नशे की गोलियों, 120 इंजेक्शन व 25 एमटीपी किट सहित गिरफ्तार किया था। इतनी बड़ी मात्रा में एमटीपी किट व नशीली दवाओं का जखीरा मिलने पर विभागीय अधिकारी भी हैरान थे। तीनों के खिलाफ पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया। उन्हें शनिवार को न्यायालय में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया गया है।
हरियाणा व पंजाब के कई शहरों से जुड़े हैं तार
तीनों से प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि इस गिरोह के तार पंजाब के कई जिलों में लुधियाना, संगरुर के अलावा हरियाणा के कैथल के अलावा जींद, फतेहबाद के शहरों कैथल, गुहला-चीका, नरवाना, टोहाना तक फैले हैं।
कैथल से है सबसे बड़ा सरगना
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस गिरोह का सबसे बड़ा सरगना कैथल से है। पुलिस को तीनों युवकों से हुई पूछताछ के बाद मुख्य सरगना की पहचान हो गई है। उसकी कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है। पुलिस द्वारा प्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ पंजाब में भी कई जगह छापेमारी की जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने एमटीपी के 13 तो पीएनडीटी सहित कुल 33 मामले दर्ज करवाए
स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक कुल 33 मामले कैथल में दर्ज किए है। जिनमें लड़का होने की दवा देने वाले पीएमडीटी एक्ट के करीब 19 मामले दर्ज किए है। वहीं एमटीपी किट के 13 मामले दर्ज किए है। वहीं अब इस मामले में एनडीपीएस एक्ट भी जुड़ गया है।
मामले की जांच कर रहे एसआई ईश्वर सिंह ने कहा कि तीनों युवकों को तीन दिन के रिमांड पर लिया गया है। तीनों से पूछताछ जारी है। कई जगह छापेमार कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में शामिल अन्य लोगों को भी शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
प्रयोग होती है एमटीपी किट
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एमटीपी किट का कई तरह से दुरुपयोग हो रहा है। नियमानुसार गर्भ ठहरने के दो माह के भीतर-भीतर चिकित्सकों की सलाह के अनुसार इसका प्रयोग होता है। लेकिन लोग तीन से चार माह के गर्भ में लड़का या लड़की होने का टेस्ट करवाकर गर्भवती महिला को ये किट खिलाते हैं। बाद में ब्लीडिंग शुरू होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया जाता है। जहां गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए उसका गर्भपात करना पड़ता है।
विभाग को भी यह अंदेशा है कि कैथल का ही एक व्यक्ति है, जो कई जगह एमटीपी किट भेजता है। कई बार यह बात महसूस की गई है। पुलिस को यदि पूछताछ में पता चला है तो उस व्यक्ति की छानबीन कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। विभाग लंबे समय से इस दिशा में प्रयास कर रहा है।
डा. नीलम कक्कड़, डिप्टी सिविल सर्जन, कैथल।