विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जहां लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद रहती है। वहीं जिला अस्पताल में दवा के लिए महिलाओं को घंटों इंतजार के बीच धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। जिसका कारण स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत नियुक्त कर्मचारियों को हटाया जाना है।
महिलाओं ने कहा कि वे दो घंटे से यहां धक्का-मुक्की का शिकार हो रही हैं। दवा के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं यहां खड़े पुरुषों ने कहा कि दवा के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार गत 1 अप्रैल से मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत नियुक्त 5 फार्मासिस्ट, 2 एलटी और 1 हेल्पर को विभाग ने चलता कर दिया। जबकि उनका पिछले 4 माह का वेतन भी लंबित है। उन्हें पिछले साल भी हटा दिया गया था। लेकिन 6-6 माह की एक्सटेंशन दी जाती रही। अब उनकी एक्सटेंशन भी आ गई है। इसके बावजूद उन्हें ज्वाइन नहीं करवाया जा रहा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यहां सभी 8 फार्मासिस्ट के पद नियमित कर्मचारियों से भर गए हैं। इसलिए इनकी ज्वाइनिंग नहीं हो सकती। जबकि 8 में से 4 फार्मासिस्ट डेपूटेशन पर भेजे गए हैं। जिस कारण जिला अस्पताल में 4 फार्मासिस्ट ही काम कर रहे हैं। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। हटा दिए गए फार्मासिस्टों औैर अन्य कर्मचारियों में से एक ने कहा कि अपने चहेते कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए उन्हें हटाया जा रहा है।
जिला अस्पताल में इंचार्ज डा. ओमप्रकाश ने कहा कि सरकार के आदेश हैं कि जहां नियमित कर्मचारी आ गए हैं। वहां कर्मचारी रखने की जरूरत नहीं है। यहां 8 फार्मासिस्ट हैं। सभी पद भरे हुए हैं। फार्मेसी में कर्मचारियों की कमी के कारण भीड़ नहीं हैं। लोग ज्यादा संख्या में आ रहे हैं तो भीड़ हो रही है। दवा सभी को दी जा रही है।