हैैफेड के पूर्व डीएम के खिलाफ 16 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज
गत 7 मार्च को सस्पेंड हो चुके हैं डीएम
पिछले सीजन में डिफाल्टर राइस मिलों को अलॉट कर दिया था धान
साथ ही विभाग की धान अलाटमेंट पॉलिसी की उल्लंघना कर 10 मिलों को तय क्षमता से अधिक धान किया था अलाट, नियमानुसार जमा नहीं करवाई थी गारंटी की राशि
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। हैफेड के पूर्व डीएम राजेश कुमार के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी सहित भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पूर्व डीएम पर डिफाल्टर मिलों को पिछले सीजन में धान अलाट करने व 10 मिलों को तय क्षमता से अधिक धान अलॉट करने के साथ-साथ धान अलॉटमेंट पॉलिसी में कई तरह की अनियमितताओं का आरोप है। गत 7 मार्च को आरोपी डीएम को सस्पेंड भी किया जा चुका है। भ्रष्टाचार को लेकर विभाग की यह बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जिसमें डीएम स्तर के अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
पुलिस में दी शिकायत में डीएम हैफेड वीपी मलिक ने कहा कि हैफेड के पूर्व डीएम राजेश कुमार, जो इस समय सस्पेंड चल रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2018-19 के दौरान कस्टम मिलिंग के लिए निजी राइस मिलों में कुछ ऐसे राइस मिलों धान अलाट कर दिया, जो पहले से ही डिफाल्टर थे। जिसके कारण हैफेड को 16 करोड़ करोड़ रुपये की वित्तीय हानि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में अलॉट हुई धान की मिलिंग में एमएस श्रीरामजी राइस लैंड नामक फर्म द्वारा गड़बड़ी किए जाने पर इस फर्म के खिलाफ केस दर्ज करवाने के लिए तत्कालीन डीएम हैफेड राजेश कुमार को निर्देश दिया गया था। साथ ही उसके गारंटर्स के खिलाफ केस दर्ज करवाने व उसकी परिसंपत्तियों को जब्त करके रिकवरी केलिए केस दायर करने के लिए कहा गया था। लेकिन डीएम ने उस समय कोई कार्रवाई नहीं की। अपनी शिकायत में डीएम वीपी मलिक ने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन डीएम राजेश कुमार ने विभाग की पॉलिसी के अनुसार मिलों से जो गारंटी के लिए 5 लाख रुपये की राशि ली जानी थी, वह भी कम ली गई। इसके साथ-साथ डीएम राजेश कुमार ने वरदान राइस मिल को एनओसी जारी कर दी। जबकि यह मिल श्रीराम राइस मिल की गारंटर थी। जबकि श्रीराम राइस मिल डिफाल्टर हो चुकी थी। इसके बावजूद डीएम राजेश कुमार ने वरदान राइस मिल को एनओसी जारी कर दी। इसी प्रकार से हैफेड को हरियाणा एग्रो फूड भी पिछले साल मिल अलाट की गई। जो श्रीराम राइस मिल के गारंटर थे। इन्हें भी धान अलाट नहीं किया जाना था। जांच के दौरान इस मिल में भी 2683 एमटी धान कम पाया गया। इसी प्रकार से एमएस गुरुनानक एग्रो इंडस्ट्रीज राइस मिल को भी डीएम राजेश कुमार ने एनओसी जारी कर दी। जो डिफॉल्टर फर्म आरएल फूड प्रोडक्ट लिमिटिड की गारंटर थी। बाद में इस फर्म को 6996 एमटी धान अलॉट किया गया। जब जांच की गई तो उसके परिसर में 2342 एमटी धान कम पाया गया। इसी प्रकार से गणपति राइस मिल सीवन को भी डीएम द्वारा धान अलॉट किया गया। जिसके खिलाफ भी पूरा धान ना देने के कारण सीवन थाने में 3 मार्च को केस दर्ज किया गया। साथ ही आरएस राइस मिल सीवन का भी 1178 एमटी धान कम पाया गया। यह सब तत्कालीन डीएम राजेश कुमार द्वारा सरकार की निर्धारित पॉलिसी का उल्लंघन करने के कारण हुआ। उक्त फर्मों को अलॉट धान के चलते विभाग को करीब 16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसी प्रकार से डीएम ने दस राइस मिलों को अतिरिक्त धान अलॉट किया गया। जो नियमानुसार अलॉट नहीं किया जा सकता था।