करनाल रोड पर सरेआम डंडों व बिंडों से युवक का पीछा करते हुए आधा दर्जन से अधिक युवकों को देखकर दहशत
दिन में बारह बजे सरेआम में हमला करने आए युवकों ने सड़क पर दौड़ाते हुए एक युवक को दबोचा
गनीमत यह रही कि वे जिसे पीटने आए थे, वह युवक वो नहीं निकला, लोगों ने ली राहत की सांस
शहर में बढ़ रही गुंडागर्दी से पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। समय रविवार 11 बजकर 50 मिनट। करनाल रोड पर संत निरंकारी सत्संग भवन के निकट सड़क किनारे बैठा एक युवक अचानक सामने से आए बाइक सवारों को देखकर भाग गया। जिन युवकों को देखकर वह भागा था, उन युवकों के हाथ में डंडे, बिंडे व अन्य हथियार थे। युवक को भागते हुए देख कर कई बाइकों पर सवार युवकों में से कई युवक उतरकर अपोजिट साइड में भाग रहे युवक के पीछे दौड़ने लगे। इसी बीच बाकी युवक बाइक लेकर भी पहुंच गए। युवक भागते हुए कभी आगे तो कभी पीछे मुड़ता। तब तक सभी युवक उस युवक के दौड़ने वाली सड़क की साइड की ओर आ चुके थे। इनमें से कई उसके पीछे भागते रहे तो कुछ उससे आगे निकल कर करनाल रोड से ढांड रोड की ओर जाने वाली सड़क पर उसे आगे से घेरने के लिए दौड़ पड़े। इनमें से एक युवक ने तो अपने मुंह पर पूरी तरह से कपड़ा लपेटा हुआ था। दो-तीन मिनट बाद ये युवक उस भाग रहे युवक को काबू करते हुए बाहर ले आए और एक हमलावर युवक सभी को शांत करते हुए सुना गया कि छोड़ दो इसे, यह नहीं है। यह तो अपना भाई है। इसके बाद सभी युवक उसे छोड़कर निकल जाते हैं। लेकिन जाते-जाते उस युवक को चेतावनी देकर गए कि बता देना उस युवक को, जिसने हमारे भाई को पीटा है। उसे छोड़ेंगे नहीं। महज 2 से 3 मिनट के इस वाक्ये को देखते हुए आस-पास की दुकानों से भारी संख्या में लोग भी बाहर आ गए थे। लेकिन हमला करने आए युवकों के हाथ में डंडे व बिंडे देखकर किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उनसे पूछ सकें कि ऐसे सरेआम क्यों गुंडागर्दी की जा रही है। इसी बीच एक नाई की दुकान में सेव करवा रहा सादी वर्दी में पुलिसकर्मी जरूर आया, उसने इन युवकों की वारदात को देखते हुए क्यूआरटी को सूचित किया। लेकिन थोड़ी ही देर में जब युवक वहां से निकल गए तो उस युवक ने क्यूआरटी को फिर से सूचित कर दिया कि यहां से वे युवक निकल गए हैं। इसलिए पिहोवा चौक की ओर उन्हें पकड़ें। इसके बाद लोगों ने कुछ राहत की सांस ली।
सरेआम गुंडागर्दी से बिगड़ रही है शहर की फिजा : यह वारदात दिनदहाडे़ दोपहर 12 बजे के आस-पास हुई। जब सड़क पर लोगों का काफी संख्या मेें आना-जाना था और दुकानों में लोग खरीदारी भी कर रहे थे। ऐसे माहौल में इस तरह की वारदात पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल उठाती है। क्या आए दिन होने वाली इन वारदातों को अंजाम देने वाले युवकों में पुलिस के प्रति कोई खौफ नहीं रह गया? क्या पुलिस महज 107-51 का चालान करने के लिए रह गई है। या फिर सड़कों पर चालान काटने में ही पुलिस की सारी एनर्जी खर्च हो रही है।