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गेहूं उठान के लिए मांगी सात रुपये प्रति कट्टा रिश्वत

Tue, 12 Apr 2016 12:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कैथल।
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कैथ्‍ाल - फोटो : अमर उजाला
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आढ़तियों व उठान के ठेकेदार के बीच हमेशा से विवाद का विषय रहे उठान कार्य में चल रही रिश्वत के खेल में सोमवार को एक आढ़ती ने ट्रक चालक के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर डाली। आढ़ती ने आरोप लगाया कि ट्रक चालक गेहूं उठान के लिए प्रति कट्टा 7 रुपये रिश्वत मांग रहा था। जो 14 रुपये प्रति क्विंटल बनती है। इस तरह से यहां उठान के लिए आढ़तियों से अवैध वसूली हो रही है। जबकि उठान का कार्य ठेकेदार का है। पुलिस ने ट्रक को अनाज मंडी चौकी पहुंचा दिया है। मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल इस संबंध में केस दर्ज नहीं हो पाया था।
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मंडी के आढ़त फर्म सूबे सिंह जसमेर सिंह के मालिक जसमेर उर्फ काला ने इस बारे में लिखित शिकायत पुलिस को की है। अपनी शिकायत में उसने बताया कि वह गेहूं की भरी हुई बोरियां लदाने के लिये एक ट्रक चालक मंडी से उठान के लिए आया। उन्होंने मजदूरों से ट्रक में बोरियों की लदाई करवा दी। इसके बाद जब वह इस ट्रक का गेट पास बनवाकर वापिस आया तो ट्रक चालक कुलदीप ने कहा कि उससे 7 रुपये प्रति पचास किलो की बोरी के हिसाब से रुपये लिये जाएंगे। उस समय तक उसमें 25 कटे लद चुके थे। उसने उनसे यह रिश्वत मंडी के आढ़ती रामनारायण, भीमसैन, राजपाल चहल सहित अनेक लोगों के सामने मांगी। उसने यह रिश्वत देने से इंकार कर दिया तो वह लदे हुए 25 गेहूं के कट्टे लेकर भागने लगा। इस पर उसने मजदूरों व अन्य लोगों की सहायता से पकड़ कर मौके पर पुलिस बुला ली।

इस पर पुलिस लदे हुये 25 कट्टों के साथ ट्रक व चालक को अपने साथ पुलिस चौकी नई अनाज मंडी में ले गई।
हालांकि पुलिस ट्रक को चौकी लेकर गई तथा मौके पर भी पहुंची। जिसकी तस्वीरें साफ-साफ बता रही हैं कि पुलिस मौके पर पहुंची है। लेकिन चौकी प्रभारी पूरी बात से ही इंकार कर रहे हैं।
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इस संबंध में नई अनाज मंडी चौकी प्रभारी बख्शा सिंह ने बताया कि उसके संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है और न ही मामला दर्ज हुआ है।

क्या है मामला:-
सीजन के समय अनाज मंडी में रखा गेहूं सूख जाता है। इसलिए आढ़तियों में भी उठान के लिए होड़ लग जाती है। आढ़ती गेहूं सूखने से कम हुए वजन के कारण उनकी ओर निकलने वाली घटोतरी से बचने के प्रयास में यह सब करते हैं। खुद ही कई आढ़ती अपनी दुकान से पहले माल उठवाने के लिए पैसे देते हैं। जो आढ़ती ऐसा नहीं करता तो उसे भी मजबूरन रिश्वत के इस खेल में शामिल होना पड़ता है। जो रिश्वत नहीं देता उसका गेहूं दुकान पर पड़ा रहता है।
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