संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में क्षय रोग यानी टीबी (माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस) बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए विशेष अभियान के तहत लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके तहत पिछले एक महीने में विभाग की ओर से 33 हजार लोगों की टीबी बचाव कार्यक्रम के तहत स्क्रीनिंग की जा चुकी है। वहीं, जिले में टीबी के पांच नए संक्रमित केस भी मिल चुके हैं।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी से बचाव कार्यक्रम के तहत छह टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें जिले के ईंट भट्ठों सहित स्लम एरिया में लोगों की जांच कर रही हंै।
उल्लेखनीय है कि टीबी की बीमारी पर लगाम लगाने के लिए लोगों की स्क्रीनिंग के साथ तीमारदारों को दवा दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक करीब 25 हजार तीमारदारों को दवा देनी शुरू कर दी गई है।
दरअसल, सरकार ने 2025 के अंत तक जिले को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत अब तक जिले में 20 गांव टीबी मुक्त भी हो चुके हैं। जिले में इस समय टीबी के 750 से अधिक सक्रिय मरीज हैं। इनको विभिन्न संगठनों की ओर से गोद भी लिया गया है। इसके तहत सरकार इन्हें 500 रुपये प्रति माह डाइट की राशि भी दे रही है। चिह्नित किए गए लोगों के टीबी के संदर्भ में सैंपल भी लिए गए हैं। बचाव के लिए करीब 25 हजार लोगों की दवाएं जरूर शुरू की जा चुकी हैं।
टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत टीबी मरीज के परिवार के सदस्यों व उसके संपर्क में आए लोगों का टीएसटी और ईग्रा टेस्ट किया जा रहा है। यदि इसमें पॉजिटिव मिलते है तो उनका उपचार शुरू होगा। इससे संपर्क में आए व्यक्ति को टीबी होने से बचाया जा सकेगा। ऐसे में अब तक 33 हजार लोगों की जांच की जा चुकी है। - डॉ. संदीप बातिश, उप सिविल सर्जन एवं जिला नोडल अधिकारी, टीबी बचाव कार्यक्रम।
यह है टीबी बीमारी
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टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा में संक्रमण से फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है। टीबी के मरीज को उपचार के दौरान इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी सूरत में डॉक्टर की बताई गई दवा न छूटे।