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Kaithal News: जीत रहे पदक पर आठ महीने से नहीं मिला खुराक भत्ता

Thu, 30 Jan 2025 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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राजिंद्र तंवर
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कैथल। खेल प्रतिभाओं को निखारने और प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पिछले वर्ष जून माह में लगभग 976 खेल नर्सरियों की शुरुआत की थी। इनमें सैकड़ों खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदकों की झड़ी लगा रहे हैं लेकिन वे खफा भी नजर आ रहे हैं। दरअसल, लगभग आठ महीनों से उन्हें खुराक भत्ता नहीं मिला है।

खेल नर्सरियों का उद्देश्य उभरते हुए खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के लिए तैयार करना है। ये खेल नर्सरियां हजारों युवाओं के लिए खेल प्रशिक्षण का मंच हैं। जिन खिलाड़ियों को खुराक भत्ता मिलना है, वे धनराशि न मिलने से खफा हैं।
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गौरतलब है कि यह समस्या सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। इन नर्सरियों में कार्यरत प्रशिक्षक भी मानदेय से महरूम हैं। ऐसी परिस्थितियों में खिलाड़ी और उनके परिवार अपनी सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद खुद खर्च उठाकर डाइट का प्रबंध कर रहे हैं।

खिलाड़ियों का कहना है कि सरकार को डाइट राशि समय पर उपलब्ध करवानी चाहिए ताकि वे अपनी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी कर सकें। खासकर यह राशि उन खिलाड़ियों के लिए बेहद जरूरी है जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

वर्तमान में कैथल जिले में सरकारी और निजी स्तर पर कुल 32 खेल नर्सरियां संचालित हैं। इनमें आठ से 14 वर्ष और 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।

सरकार ने आठ से 14 साल तक के खिलाड़ियों को हर महीने 1500 रुपये और 15 से 19 साल तक के खिलाड़ियों को हर महीने दो हजार रुपये डाइट भत्ता देने का प्रावधान किया है। हालांकि पिछले वर्ष 15 जून से शुरू हुई इन नर्सरियों के खिलाड़ियों को अभी तक यह राशि उनके खाते में प्राप्त नहीं हुई है। सरकार ने खिलाड़ियों को समय पर डाइट भत्ता देने की बात कही थी ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी फिटनेस और डाइट का ध्यान रख सकें लेकिन आठ महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी सरकार का वादा अधूरा है।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खिलाड़ियों की पोषण संबंधी जरूरतों की अनदेखी की गई तो यह उनके प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। सरकार और संबंधित विभाग को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए ताकि खिलाड़ी अपना ध्यान सिर्फ खेल और अपनी तैयारी पर केंद्रित कर सकें।

दूसरी ओर खिलाड़ियों के अभिभावकों का कहना है कि जब सरकार ने डाइट भत्ता देने का वादा किया था तो इसे प्राथमिकता के साथ लागू किया जाना चाहिए। खुराक की कमी से खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक दोनों स्तर पर कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द लंबित राशि जारी करे।

विभाग के कोच राजेश ने बताया कि खिलाड़ियों की खुराक भत्ता राशि हेड ऑफिस से सीधे उनके ही खाते में आएगी। उन्होंने बताया कि पूरे हरियाणा में सभी खिलाड़ियों की खुराक भत्ता राशि एक साथ आएगी। यह कब जारी होगी, वे नहीं बता सके। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की हाजरी जमा करवा दी गई है। संवाद
परेशान खिलाड़ियों ने सुनाई व्यथा
राजकीय मिडिल स्कूल फ्रांसवाला की हैंडबॉल नर्सरी की खिलाड़ी तन्नू ने बताया कि उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। पिछले आठ महीनों से खुराक भत्ता राशि खाते में नही आई है। सरकार से आग्रह है कि खुराक भत्ता जल्द दिया जाए।

राजकीय मिडिल स्कूल फ्रांसवाला की हैंडबॉल नर्सरी की खिलाड़ी शिखा ने बताया कि जून से अब तक डाइट भत्ता नहीं मिला। किसी तरह खुद के खर्च से चने, मूंग, बादाम और दूध खरीद रहे हैं। संबंधित विभाग को इस विषय पर ध्यान देना चाहिए।

कुलतारण गांव के राजकीय स्कूल में स्थित बॉक्सिंग नर्सरी के मुक्केबाज खिलाड़ी गुरप्रीत ने कहा कि वे पिछले कई महीनों से सुबह-शाम इस मैदान पर अभ्यास करने आते हैं। खुराक भत्ता राशि न मिलने से उन्हें खुद दूध और फल खरीदना पड़ रहा है।
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कुलतारण गांव के राजकीय स्कूल में स्थित बॉक्सिंग नर्सरी के मुक्केबाज खिलाड़ी गौतम ने कहा की प्रतिदिन अभ्यास के बाद डाइट की जरूरत पड़ती है। प्रदर्शन में दिक्कत न हो इसलिए परिजनों को राशि खर्च करनी पड़ती है।
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