। शहर में विभिन्न वार्डों में आठ से दस गुना तक बिना टेंडर के बढ़ाई जा रही गलियों व सड़कों की राशि के मामले की जांच होगी। डीसी डा. प्रियंका सोनी ने यह फैसला लिया है। शहर में एक नहीं बल्कि कई वार्डों में ऐसी गलियों के रिवाइज एस्टिमेट अधिकारियों द्वारा पारित किए जा रहे हैं, जो गलियां बन चुकी हैं। या फिर रिवाइज किए गए बजट से उन गलियों की लागत 8 से 10 गुणा तक कम है। पार्षद राकेश सरदाना द्वारा किए गए खुलासे के बाद अमर उजाला द्वारा यह मामला उठाया गया है।
क्या है मामला: शहर के विभिन्न वार्डों में गलियों के निर्माण में बड़ी धांधली चल रही है। कई गलियों के मामले में ऐसी जानकारी मिली है कि उनके टेंडर 4 लाख या फिर 5 लाख रुपये लगाकर छुड़वाए गए थे। बाद में ठेकेदार व अधिकारियों की मिलीभगत ने इन गलियों के लिए रिवाइज एस्टिमेट पारित कर दिए गए। पिछले टेंडर पर मुश्किल से 10 प्रतिशत तक की राशि बढ़ाई जा सकती है। जिसमें लागत में कम या ज्यादा रहने की संभावनाएं रहती हैं। लेकिन बताया जा रहा है कि अधिकारी बिना नए सिरे से टेंडर लगाए राशि को आठ से दस गुना तक नहीं बढ़ा सकते। शहर में कई गलियों की लागत को 2 लाख से बढ़ाकर 19 लाख रुपये, 4.45 लाख से बढ़ाकर 24.90 लाख रुपये तक की पारित की गई है। पार्षद राकेश सरदाना ने बताया कि पिहोवा चौक के निकट ही एक ऐसी गली जिसका टेंडर 4.45 लाख रुपये लगाया गया था। उसके लिए रिवाइज एस्टिमेट 24.90 लाख रुपये पारित किया गया है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है।
कई वार्डों में चल रहा है भ्रष्टाचार का खेल : पार्षद व परिषद सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचार का यह खेल एक वार्ड में नहीं, बल्कि कई वार्डों में चल रहा है। जांच हो जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है।
पुराने ब्लाकों को किया जा रहा है खुर्द-बुर्द : पार्षद राकेश सरदाना का कहना है कि शहर में जितनी भी गलियां बनाई जा रही हैं। उन गलियों के पुराने ब्लाकों को खुद-बुर्द किया जा रहा है। जब अधिकारियों से जवाब मांगते हैं तो वे कहते हैं कि ब्लाकों को नंदीशाला भेजा जा रहा है। जबकि नंदीशाला अधिकारी बिना किसी नियम कानून के ब्लॉक भेज ही नहीं सकते। पूरे मामले में अधिकारी व ठेकेदारों की मिलीभगत चल रही है। इसीलिए कोई पूछने वाला नहीं है। वे शीघ्र ही इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री मनोहर लाल को करेंगे।
एमई राजकुमार का कहना है कि जितने भी गलियों में पुराने ब्लॉक निकलते हैं। उनका शहर के तीनों जेई की एमबी बुक में इंट्री होती है। इसके अलावा इन्हें नंदी शाला में भी भेजा जाता है। ताकि गोशाला में जगह को पक्का किया जा सके।
उधर, प्रधान रामलाल ने कहा कि 1 अप्रैल से आज तक 41 ट्राली नंदीशाला में पहुंची हैं। इससे पहले नाम मात्र ही ब्लॉक पहुंचे हैं। एक ट्राली में 800 से 900 ब्लॉक होते हैं। कई बार 1000 ब्लॉक भी होते हैं। अभी तक ये ब्लॉक ऐसे ही पड़े हैं। यहां सारे अच्छे ब्लॉक नहीं होते, बल्कि वे टूटे-फूटे व रोड़ा बजरी के रुप में आते हैं। दो से चार ठेकेदारों से आग्रह करके ब्लॉक गिरवाए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि सारी नई बनने वाली गलियों के ब्लॉक नंदीशाला में पहुंच रहे हैं।