संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। खुशहाल माजरा गांव में अवैध रूप से संचालित राइस मिलों और प्रदूषण फैलाने के आरोपों को लेकर विवाद थमता नहीं दिख रहा है। हाल ही में राइस मिल एसोसिएशन द्वारा शिकायतकर्ता ग्रामीणों को ब्लैकमेलर कहने के बाद माहौल और गरम हो गया।
पूर्व सरपंच चांदीराम ने कहा कि एसोसिएशन को आरोप लगाने से पहले अपने दोषी सदस्यों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत और मानव अधिकार आयोग के दखल के बाद कई राइस मिलों पर कार्रवाई की गई है, जबकि कुछ मिलों को प्रदूषण विभाग ने रीचार्ज बोर के माध्यम से गंदा पानी जमीन में छोड़ने पर सील भी कर दिया। ऐसे में ग्रामीणों को बदनाम करना अनुचित है और पीड़ितों की आवाज दबाने का प्रयास माना जा रहा है।
चांदीराम ने बताया कि ग्रामीण जल्द ही एसपी कैथल से मिलकर उन मिल संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे, जो भूजल को प्रदूषित कर स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक उल्लंघन नहीं, बल्कि आपराधिक कृत्य बताया।
चांदीराम ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण किसी भी अवैध गतिविधि को संरक्षण नहीं देते। यदि दोषी मिलों पर कानूनी कार्रवाई की जाती है तो गांव वाले उसका समर्थन करेंगे, अन्यथा संघर्ष जारी रहेगा।
श्रम कानूनों और फायर एनओसी की अनदेखी पर सवाल ः पूर्व सरपंच ने आरोप लगाया कि कई राइस मिलें बिना फायर एनओसी और श्रम कानूनों का पालन किए मजदूरों को असुरक्षित परिस्थितियों में काम कराती हैं। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में सख्त कार्रवाई की मांग की।
राइस मिल एसोसिएशन से जवाब की मांग
पूर्व सरपंच चांदीराम ने संगठन से सवाल किया कि जिन मिलों को प्रदूषण विभाग ने सील किया, क्या एसोसिएशन ने उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की? उन्होंने कहा कि यदि एसोसिएशन सच में पारदर्शिता और नियमों के पक्ष में है, तो पहले दोषी मिलों पर कार्रवाई कराए।