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Kaithal News: लगातार मोबाइल का प्रयोग बढ़ा रहा मानसिक बीमारियां

Sun, 30 Jun 2024 04:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। रविवार को सोशल मीडिया दिवस है। पिछले कुछ समय से पूरे विश्व में सोशल मीडिया का काफी प्रभाव बढ़ा है। ऐसे में बढ़ रहे सोशल मीडिया के प्रयोग ने लोगों के जीवन में बदलाव किया है। वहीं, लगातार मोबाइल के प्रयोग ने मानसिक बीमारियों को बढ़ावा दिया है। आज जिसका नतीजा यह है कि अब एक दिन में मनोरोग के 100 से 150 लोग शिकार हो रहे हैं। अब इसके समाधान के लिए मोबाइल का प्रयोग कम करना जरूरी है। यह जानकारी मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक गर्ग ने दी है।

डॉ. गर्ग ने बताया कि सोशल नेटवर्किंग आधुनिक डिजिटल समाज के जीवन में गहराई से समा गई है। यह लोगों में कनेक्टिविटी के साथ साथ जरूरी सूचनाओं को जल्दी पहुंचाने का कार्य करता है। परंतु सोशल मीडिया के लाभ के साथ ही बहुत सी हानियां भी हैं। बिना उचित नियंत्रण के सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग गलत सूचना फैला सकता है। गोपनीयता से समझौता कर सकता है। उत्पादकता को कम कर सकता है और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। सोशल मीडिया का अधिक उपयोग खासकर आज के नवयुवकों में इंटरनेट एडिक्टशन का कारण बन रहा है। इसका अधिक प्रयोग होने से आज के नवयुवक सामाजिक नहीं हो पाते और उनके मानसिक पटल पर दुष्प्रभाव आने शुरू हो जाते हैं। वो अधिक चिड़चिड़े हो जाते है और अवसाद उन्हें अपनी चपट में ले लेता है। अकेलापन, उदासी, नींद की कमी, आंखों में रोशनी की कमी, सिर दर्द आदि कई तरह की परेशानियां व्यक्ति को अवसाद की तरफ ले जाती हैं।
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बहुत से लोग साइबर क्राइम का भी आजकल शिकार हो रहे हैं। इसलिए, समय सीमा का पालन करके, नोटिफिकेशन को अक्षम करके, सूचना की विश्वसनीयता का आकलन करके और वास्तविक जीवन के रिश्तों पर अधिक ध्यान केंद्रित करके सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का संयम से उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

साइबर अपराध रोकने में जागरूकता जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी

कैथल। साइबर अटैक अथवा साइबर अपराधों को रोकने में सरकार ही नहीं बल्कि उपभोक्ता की भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे हमलों को रोकने में उपभोक्ताओं की सजगता और सतर्कता की बड़ी भूमिका होती है। बचाव का उपाय जागरूकता है।

यह जानकारी डीसी प्रशांत पंवार दी है। उन्होंने बताया कि साइबर अटैक के लिए आवश्यक है कि उपभोक्ता, फोरम या वेबसाइट्स पर अपनी संवेदनशील जानकारी ईमेल आईडी, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड की डिटेल शेयर न करें। अपना पासवर्ड मजबूत रखें, कोई भी लिंक क्लिक करने से पहले देखें कि वह वेबसाइट ठीक है बताया कि सिस्टम की सुरक्षा के लिए अपने सिस्टम को अपडेट करते रहें और भरोसेमंद सॉफ्टवेयर इंस्टाल करें। भेजे जाने वाले स्पेम मैसेज को खोलने से बचें, ओपन वाई-फाई का इस्तेमाल न करें। साथ ही एक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का प्रयोग करें। आप एक सुरक्षित नेटवर्क से जुड़कर और सावधानी और सजगता बरत कर साइबर हमले व अपराध की गिरफ्त में आने से बच सकते हैं। पुलिस विभाग ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 शुरू किया है।
यह है साइबर सिक्योरिटी

डीसी ने बताया कि साइबर सिक्योरिटी का मतलब एक तरह की इंटरनेट सिक्योरिटी से है, जो आपको मैलवेयर, ब्लैक हैट हैकर्स या किसी अन्य तरह के साइबर हमलों से बचाती है। साइबर सुरक्षा में कंप्यूटर और नेटवर्क में उपलब्ध किसी भी प्रकार की सूचनाओं और डाटा को सुरक्षित और गोपनीय रखने का अभ्यास किया जाता है। डीसी ने बताया कि डिवाइस में एंटीवायरस को जरूर इंस्टॉल करना चाहिए। इसका ध्यान रखें कि बैंक आपसे कभी भी एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी, ओटीपी, यूपीआई पिन आदि की मांग नहीं करता है। सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करें। हमेशा मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें। पासवर्ड ऐसा रखें जिसका कोई भी व्यक्ति अनुमान ना लगा सके। पासवर्ड को हमेशा गुप्त रखें और किसी को ना बताएं। किसी अज्ञात ईमेल अटैचमेंट को कभी भी ना खोलें। यह डाटा चुराने की साजिश हो सकती है। अज्ञात ईमेल में लिंक पर क्लिक न करें। असुरक्षित नेटवर्क का इस्तेमाल ना करें।
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धमकी देकर ठगी कर रहे साइबर अपराधी ः शुभ्रांशु

कैथल। साइबर ठग फर्जी पुलिस या फर्जी कस्टम अधिकारी बनकर आमजन से पैसे की मांग करते हैं। उन्हें नशा तस्करी में फंसाने की धमकी दी जाती है। ऐसे ठगों से बचने के लिए पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। साइबर थाना के पीएसआई शुभ्रांशु ने कहा कि साइबर ठग आमजन को इंटरनेशनल नंबर या अन्य नंबर से कॉल करते हैं व कहते है कि आपका एक कोरियर एयरपोर्ट या अन्य जगह पर आया हुआ है, इसमें आपने नशीली दवाइयां या अन्य मादक पदार्थ तस्करी के लिए मंगवाया है। वो आपको पुलिस की वर्दी में वीडियो कॉल करके केस में फंसाकर जेल में भेजने की धमकी देते हैं। सावधान रहे। संवाद
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