तंवर को राजनीतिक बयानबाजी करने से रोक दिया गया
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर रविवार सुबह गांव देवबन कैंची चौक पर धरना देने की तैयारी कर रहे जाट समाज के लोगों के बीच पहुंच गए। वहां प्रशासन द्वारा धरने की अनुमति ना देने पर जैसे ही तंवर ने निंदा करते हुए बोलना शुरू किया। उसी समय प्रशासन के साथ चल रही बैठक बीच में छोड़कर मौके पर पहुंचे जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष प्रवीण किच्छाना ने उन्हें बीच में रोक दिया। उन्होंने कहा कि सर, आप यहां आए, स्वागत है। लेकिन कोई ऐसी राजनीतिक बात ना करें जिससे हमारे लोग भड़क जाएं। अभी प्रशासन के साथ बातचीत की प्रक्रिया बीच में है। जिस पर तंवर ने कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर ना तो कभी राजनीति की है और ना ही करेंगे। कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि सामाजिक न्याय की इस लड़ाई में वह लोगों के साथ हैं। हर वो समाज जो सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक आधार पर पिछड़ा है, उन लोगों को जरूरत के अनुसार आरक्षण दिया जाना चाहिए। सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। मिलकर लोग लड़ाई लड़ें।
इसके बाद मीडिया से बातचीत में अशोक तंवर ने कहा कि वे कलायत जाते समय रास्ते में लोगों को देखकर रुक गए थे। विपक्ष के नाते वे उनसे मिलने गए थे। कांग्रेस द्वारा आंदोलन करवाए जाने के आरोप निराधार हैं। यह समाज की लड़ाई है। कांग्रेस का फैसला नहीं है आंदोलन का। यहां समाज बैठा है। जिसमें सभी पार्टियों के लोग हो सकते हैं। जाट आरक्षण के मुद्दे पर सियासत के चलते ही बड़ा नुकसान हुआ है। सरकार बातचीत से इस मसले का हल निकाले। आरक्षण की समीक्षा के प्रश्न पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग को आज तक समानता नहीं मिल पाई है। समीक्षा बीजेपी व आरएसएस का एजेंडा है। 10 साल के लिए दिया गया था, सही है। लेकिन अभी तक भी वह वर्ग ऊपर नहीं उठ पाया है, जिसे आरक्षण दिया गया है। पहले आरक्षण का लाभ दिया जाए। तब समीक्षा की बात होगी।