शहर में कई मोहल्लों में सदियों पुरानी इमारतें कभी भी धराशायी हो सकती हैं। आस-पास रहने वाले लोगों की जान को खतरा है। पिछले दो साल में कई इमारतें एवं उनके हिस्से गिर चुके हैं। लेकिन इन इमारतों को हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
यहां प्रताप गेट, कोठी गेट, पंसारिया मोहल्ला, नोता हलवाई चौक सहित अन्य कई स्थानों पर बेहद जर्जर हालत में इमारतें हैं। जो ढह सकती हैं। आस रहने वाले लोगों ने बताया कि मालिक घर छोड़ कर चले गए हैं। लेकिन कई इमारतें हैं जिनके मालिक यहीं रहते हैं। कई मकान मालिकों को कहा गया, लेकिन मकान मालिक लड़ाई झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। वह कहते है कि हमारा मकान है, जब मर्जी होगी तब बनाएंगे।
शहरवासी रमेश कुमार, मोहन लाल, देवराज चौहान, सुनील कुमार, मुकेश कुमार ने बताया कि प्रताप गेट पर एक धार्मिक स्थल काफी जर्जर हालत में है। जो कभी भी ढह सकती है। लेकिन इस इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। इसी प्रकार से नोता हलवाई चौक के दुकानदारों ने बताया कि सब्जी मंडी को जाने वाली गली के नुक्कड़ की दुकान कुछ माह पहले ही ढह गई थी।
उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और ना ही उस समय सड़क से कोई वाहन गुजर रहा था। एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। उसी दुकान के पास दो ओर दुकान बेहद जर्जर हैं और यह दुकान कभी भी गिर सकती है। कई बार दुकानदारों ने संबधित विभाग में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अमरगढ़ गामड़ी की गली-7 में एक बिल्डिंग जर्जर है। पास ही स्कूल होने की वजह से कभी जान माल का नुकसान हो सकता है। लोगों ने बताया कि वह स्वयं चाहते हैं कि इस जर्जर इमारत को पहले ही गिरा दिया जाए। नहीं तो कभी भी कोई हादसा हो सकता है।
प्रताप गेट निवासी मुकेश कुमार ने कहा कि प्रताप गेट में स्थित यह इमारत जर्जर हालत में है ओर कभी भी ढह सकती है। जिससे कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। सबंधित विभाग को इस प्रकार की जर्जर इमारतों की सुध लेनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार से होने वाले नुकसान से लोगों को बचाया जा सके। नगर पालिका को ऐसी इमारतों के मालिकों को नोटिस जारी करने चाहिए।
कोर्ट में लंबित मामलों के कारण परेशानी
शहरवासी धर्मपाल ने कहा कि शहर में बहुत ही इमारतें ऐसी है कि जो कभी भी ढह सकती हैं। इस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। लंबे समय से लोग मौत के साये में जी रहे है। लोग इन इमारतों को गिरने की शिकायत करने से भी कतराने लगे हैं। क्योंकि कार्रवाई तो होनी नहीं, उलटा मालिक से दुश्मनी हो जाती है। अधिकतर लोग उसके खिलाफ बोलना ही नहीं चाहते। लेकिन विभाग को यह देखना चाहिए कि इमारत के ढहने से नुकसान हो सकता है। ऐसी इमारतों की पहचान कर इन्हें ढहा देना चाहिए।
कई इमारतों के केस कोर्ट में चल रहे है और कुछ के मालिक इमारतों को छोड़ कर जा चुके हैं। प्रताप गेट पर एक भवन सरकारी नियंत्रण में है। जिस पर कार्रवाई करने से पहले विभाग की अनुमति लेना भी जरूरी है।
इसके लिए पहले भी नोटिस जारी किया था। एक बार फिर इन इमारतों के मालिकों को नोटिस जारी किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो प्रशासन खुद ही इन्हें हटवाएगा।
एसके गोयल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद।